बिल 3 से 4 गुना बढ़ने पर गांव वाले खूनी मोर्चे पर: नंबर बदलने पर बड़ा घोटाला, अधिकारियों के ‘टेक्निकल गड़बड़ी’ के तर्कों के खिलाफ लोगों का गुस्सा जारी
स्मार्ट मीटर के खिलाफ पूरे गुजरात में शुरू हुई विरोध की आग अब उग्र और जानलेवा रूप लेती जा रही है। जहां पूरे राज्य में शुरुआती विरोध प्रदर्शन थम नहीं रहे हैं, वहीं अब डभोई तालुका के सथोड़ गांव में स्मार्ट मीटर की बिलिंग के मुद्दे पर बड़ा धमाका हुआ है। एक तरफ स्मार्ट मीटर के नंबरों में बदलाव से बिजली उपभोक्ता भारी कन्फ्यूजन और परेशानी में हैं, वहीं दूसरी तरफ आंखें खोल देने वाले कमरतोड़ बिलों की वजह से गांव वालों की भारी भीड़ सथोड़ गांव पंचायत ऑफिस में जमा हो गई और MGVCL (मध्य गुजरात इलेक्ट्रिसिटी कंपनी लिमिटेड) के खिलाफ जमकर विरोध जताया और सीधे स्मार्ट मीटर तोड़ने की धमकी दी।
एक महीने का बिल दो महीने के बिल से 4 गुना ज्यादा!
बिलिंग का गणित ही सथोद गांव के बिजली कंज्यूमर्स के गुस्से के चरम पर पहुंचने का कारण है। गांववालों के मुताबिक, पहले हर दो महीने में रेगुलर बिजली बिल आते थे, जो बजट में थे। स्मार्ट मीटर लगने के बाद अब हर महीने बिल दिए जा रहे हैं। परेशान करने वाली बात यह है कि सिर्फ एक महीने का बिल पिछले दो महीने के बिल से 3 से 4 गुना ज्यादा आ रहा है! इस तरह से लूट का सीधा असर कंज्यूमर्स की जेब पर पड़ने से लोग गुस्से में थे और पूरा गांव इकट्ठा होकर पंचायत ऑफिस पहुंच गया।
अधिकारी का कबूलनामा: 4000 कंज्यूमर्स प्रभावित, बिल एडजस्ट करने का भरोसा
लोगों के भारी गुस्से और हंगामे से हालात बिगड़ते, इससे पहले MGVCL के अधिकारी के.डी. सोनी मौके पर पहुंचे। उन्होंने हालात को शांत करने की कोशिश करते हुए टेक्निकल फॉल्ट की बात मानी। अधिकारी के.डी. सोनी ने कहा कि यह समस्या टेक्निकल फॉल्ट की वजह से आई है, जिससे करीब 4000 बिजली कंज्यूमर्स प्रभावित हुए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन कंज्यूमर्स के बिल ज़्यादा आए हैं, उन्हें ठीक कर दिया गया है और ज़्यादा रकम अगले बिजली बिल में ‘एडजस्ट’ (काट) दी जाएगी।
अधिकारियों के बहाने नहीं चलेंगे, आर-पार की लड़ाई की तैयारी
बिजली कंपनी के अधिकारियों ने टेक्निकल फॉल्ट का हवाला देकर उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश की है, लेकिन गांववाले इस सफाई से बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। सठोद के गांववालों ने बिजली कंपनी और एडमिनिस्ट्रेशन को साफ और आखिरी चेतावनी दी है कि अगर इस प्रॉब्लम का जल्द से जल्द पक्का और संतोषजनक हल नहीं किया गया, तो वे अपने घरों और जगहों से स्मार्ट मीटर उतारकर उग्र आंदोलन करेंगे। अब देखना यह है कि एडमिनिस्ट्रेशन इस आग को शांत करता है या गांववालों का यह विरोध पूरे जिले में ज्वालामुखी की तरह फूटता है।

