अहमदाबाद के ऐतिहासिक और बहुत सेंसिटिव दरियापुर इलाके में मौजूद ‘मनपसंद जिमखाना’ आज कानून-व्यवस्था को लागू करने पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है। क्लब और स्पोर्ट्स एक्टिविटी की आड़ में चलने वाली यह जगह असल में करोड़ों रुपये के काले कारोबार का मुख्य अड्डा बन गई है। बार-बार छापे, करोड़ों कैश की ज़ब्ती और हाई-प्रोफाइल जुआरियों की गिरफ्तारी के बावजूद, यह जगह हमेशा राख से उड़ते पक्षी की तरह फलती-फूलती रहती है।
अब शहर और खासकर पुलिस फोर्स में यह ज्वलंत सवाल है कि क्या यह हाई-टेक जुए का अड्डा हमेशा के लिए बंद हो जाएगा या कई ईमानदार और ईमानदार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की कुर्बानी जारी रहेगी? हाई-टेक नेटवर्क और ‘सिंडिकेट’ का खेल
पसंदीदा जिमखाना कोई आम जुए का अड्डा नहीं, बल्कि एक एडवांस्ड नेटवर्क है:
हाई-टेक सिक्योरिटी और CCTV: यहां रेड करने आने वाली पुलिस या SMC टीमों पर नज़र रखने के लिए खास वॉचमैन और कंट्रोल रूम रखे जाते हैं।
बड़े ट्रेडर्स और शौकिया लोगों का अड्डा: न सिर्फ लोकल लोग, बल्कि अहमदाबाद के बाहर से भी जाने-माने ट्रेडर्स और बुकीज़ यहां लाखों रुपये जीतने और हारने का गेम खेलने आते हैं।
टोकन और ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन: ऐसी चर्चाएं हैं कि रेड के दौरान कैश पकड़े जाने से बचने के लिए टोकन सिस्टम और हवाला के ज़रिए पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं।
खाकी की इज़्ज़त दांव पर: क्या सिस्टम बेबस है या एक्सटॉर्शन का खेल?
जब भी स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) या बाहरी एजेंसियां दरियापुर पुलिस स्टेशन की सीमा में रेड करती हैं, तो लोकल पुलिस की इनएक्टिविटी और इन्वॉल्वमेंट पर उंगली उठाई जाती है।
अफसरों पर इल्ज़ाम: पहले भी इसी बेस की वजह से लोकल PIs, PSIs और स्टाफ़ एम्प्लॉइज़ के खिलाफ़ सस्पेंशन और ट्रांसफर जैसे सख्त कदम उठाए गए हैं। पुलिस फोर्स में खलबली: इस अड्डे पर रेड छोटे लेवल के कर्मचारियों से लेकर बड़े अधिकारियों के करियर पर हमेशा के लिए असर डालती है।
बड़े बॉस का हाथ? हर बार रेड के बाद सिर्फ जुआरी पकड़े जाते हैं, लेकिन पुलिस इन जिमखानों को चलाने वाले मुख्य लोगों और पर्दे के पीछे उन्हें बचाने वाले
राजनीतिक या सामाजिक ‘बॉस’ तक कभी नहीं पहुंच पाती।
गुजरात से सीधा सवाल: इसका परमानेंट सॉल्यूशन कब होगा?
सिस्टम में सबसे बड़ी कमी यह है कि आरोपियों को सिर्फ प्रोहिबिशन या गैंबलिंग एक्ट के तहत क्राइम दर्ज करने के बाद कंडीशनल बेल पर रिहा कर दिया जाता है। अगर होम डिपार्टमेंट और अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर सच में कड़ा रुख अपनाना चाहते हैं, तो उन्हें इस जिमखाने का लाइसेंस हमेशा के लिए कैंसिल कर देना चाहिए और जगह को सील कर देना चाहिए।
शहर के लोग अब देखना चाहते हैं कि क्या कानून का चाबुक इस हाई-टेक हब को हमेशा के लिए खत्म कर देगा या भविष्य में किसी नए अधिकारी के गिरने के बाद भी यही काला धंधा चलता रहेगा।

