प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गलत और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में वायरल हुई रुचिका सिंह के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी तौर पर गरमा गया है। अब CJP (CJP – प्रोटेस्ट ऑर्गनाइजेशन) ऑफिशियली लड़की के बचाव में आगे आया है।
CJP के प्रवक्ता ने सवाल उठाया है कि देश में अभद्र भाषा या शब्दों का इस्तेमाल कब से कानूनी जुर्म हो गया है? आम जिंदगी में लोग अपनी रोजमर्रा की बातचीत में ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। सिर्फ बोले गए शब्दों के आधार पर क्रिमिनल केस दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल है।
MPs के खिलाफ गंभीर अपराधों पर CGP का तीखा हमला
CGP ने देश के राजनीतिक सिस्टम पर हमला करते हुए सवाल उठाए हैं:
गंभीर आरोपों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं: देश के लगभग 50 प्रतिशत लोकसभा MPs के खिलाफ रेप, हत्या और डकैती जैसे गंभीर क्रिमिनल चार्ज दर्ज हैं, फिर भी उनके खिलाफ कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती।
पुलिस की परफॉर्मेंस पर सवाल: पुलिस को अपनी पूरी एनर्जी और रिसोर्स ऐसे गंभीर अपराधियों के खिलाफ लगाने चाहिए, न कि किसी आम लड़की के पीछे पड़ना चाहिए।
भाषा नहीं, न्याय और बराबरी की लड़ाई
CGP के मुताबिक, यह विवाद सिर्फ आपत्तिजनक भाषा तक सीमित नहीं है। यह लड़ाई देश में न्याय और कानूनी बराबरी के लिए है। जब कानून के स्टैंडर्ड नेताओं और शासकों के लिए अलग हों और देश की आम जनता या युवाओं के लिए अलग हों, तो कानून की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
फिलहाल, इस मामले में दिल्ली पुलिस की तरफ से आगे की जांच की जा रही है, लेकिन दूसरी तरफ, CGP के इस सख्त रुख ने मामले को और विवादित बना दिया है।

