अहमदाबाद : देश की पॉलिटिक्स और पब्लिक लाइफ में इस्तेमाल होने वाली भाषा का लेवल और पॉलिटिकल बयानबाजी हाल ही में चर्चा का एक बड़ा टॉपिक बन गया है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूलिंग पार्टी ने हाल ही में विपक्षी नेताओं के भद्दे कमेंट्स का विरोध किया है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया और पब्लिक फोरम पर लोगों के बीच रूलिंग पार्टी और विपक्ष दोनों के पिछले बयानों और उनके सपोर्टर्स के बर्ताव को लेकर भी गरमागरम चर्चाएं हुई हैं।
पिछली कड़वाहट और पॉलिटिकल भाषा का मुद्दा
पॉलिटिकल एनालिस्ट और नागरिकों के बीच इस बात पर बहस चल रही है कि पॉलिटिक्स में दोनों तरफ से भाषा की लिमिट बनाए रखनी चाहिए। आलोचक पिछली पॉलिटिकल कमेंट्स, जैसे विपक्षी नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर कटाक्ष, का हवाला देकर यह सवाल उठा रहे हैं कि जब अपनी ही पार्टी की तरफ से तीखी या पर्सनल कमेंट्स किए जाते हैं तो नैतिक स्टैंडर्ड अलग क्यों हो सकते हैं? सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा और सपोर्टर्स की गाली-गलौज
दूसरी तरफ, आजकल सोशल मीडिया के ज़रिए फ्रीलांस जर्नलिस्ट, यूट्यूबर्स, सोशल एक्टिविस्ट, स्टूडेंट्स और अलग-अलग प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने वाले लोगों के खिलाफ जिस तरह की गंदी भाषा और गाली-गलौज का इस्तेमाल हो रहा है, उसे लेकर भी गंभीर चिंता जताई जा रही है। जिस तरह से पॉलिटिकल सपोर्टर्स अपने विरोधियों के खिलाफ घटिया भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, लोग सवाल उठा रहे हैं कि सभी पार्टियों की टॉप लीडरशिप अपने सपोर्टर्स को संयम बनाए रखने की सख्त हिदायत क्यों नहीं दे रही है।
गांधीजी और देश के आदर्शों पर चुप्पी पर सवाल
पब्लिक डिबेट में उन लोगों के खिलाफ भी सख्त रूख अपनाने की मांग हो रही है जो महात्मा गांधी के हत्यारों को सही ठहराते हैं और अहिंसा के सिद्धांतों का अपमान करते हैं। यह आवाज उठ रही है कि सभी पॉलिटिकल पार्टियां न्यूज़ चैनलों की डिबेट में इस्तेमाल हो रही गंदी भाषा और पर्सनल इल्ज़ामों के खिलाफ अपने स्पोक्सपर्सन के खिलाफ सख्त एक्शन लें।
लोगों के बीच इस बात पर बहस चल रही है कि डेमोक्रेसी में सभी को असहमति जताने का हक है, लेकिन असहमति का मतलब किसी की पर्सनल बेइज्ज़ती करना या उसके माता-पिता या भाई-बहनों को गाली देना नहीं हो सकता। समाज में सभ्यता और अनुशासन तभी बना रहेगा जब राजनीतिक नेता और पार्टियां खुद ऊंचे स्टैंडर्ड तय करेंगी। सभ्य समाज में किसी भी पार्टी या विचारधारा की बदतमीज़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

