गुजरात का हृदय माने जाने वाले और यूनेस्को द्वारा वैश्विक विरासत शहर के रूप में घोषित अहमदाबाद महानगर की भव्यता में कई ऐतिहासिक स्थापत्य चार चाँद लगाते हैं। इस स्थापत्य की शृंखला में यदि कोई स्थान अहमदाबाद की अस्मिता, मनोरंजन और स्थापत्य कला का सर्वोच्च प्रतीक है, तो वह नगर के मध्य में आलीशान मुकुट के समान सुशोभित ऐतिहासिक ‘काँकरिया तालाब’ है। सदियों पुराना इतिहास और आधुनिक नगर जीवन की चेतना को अपने किनारे समेटे हुए काँकरिया मात्र एक जलाशय नहीं है, बल्कि यह असंख्य अहमदाबादियों की स्मृतियों और आनंद का जीवंत केंद्र है।
इस ऐतिहासिक जलाशय के निर्माण की पृष्ठभूमि पंद्रहवीं शताब्दी से जुड़ी हुई है। इतिहास के पन्नों के अनुसार, वर्ष 1451 में अहमदाबाद के सुल्तान कुतबुद्दीन अहमदशाह द्वितीय द्वारा इस तालाब का निर्माण कराया गया था, जिसके कारण कालक्रम में इसे ‘हौज-ए-कुतब’ के रूप में भी जाना जाता था। चौलुक्य शैली के प्रभाव वाली अनूठी बहुभुज संरचना में बने इस तालाब के कुल 34 पहलू (किनारे) हैं, जो तत्कालीन शिल्प स्थापत्य और जल प्रबंधन की अभूतपूर्व इंजीनियरिंग कुशलता को दर्शाते हैं। तालाब के मध्य में स्थित कलात्मक उद्यान ‘नगीना वाड़ी’ के रूप में प्रसिद्ध है, जो एक सुंदर सेतु (पैदल मार्ग) द्वारा किनारे से जुड़ा हुआ है और मुगल काल के दौरान यह शाही परिवारों का सैरगाह स्थल था।
समय के प्रवाह के साथ जीर्ण-शीर्ण हो चुकी इस ऐतिहासिक विरासत को 21वीं सदी की शुरुआत में नया जीवन मिला। वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘काँकरिया लेकफ्रंट’ (तालाब तट विकास परियोजना) साकार हुई, जिसने अहमदाबाद के पर्यटन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। आज यह स्थान पर्यटकों के लिए एक वैश्विक स्तर का आकर्षण बन चुका है। लंदन के अद्भुत विशाल झूले की तर्ज पर बनी ‘अहमदाबाद आई’ सवारी, बच्चों की अतिप्रिय और जापान से मंगाई गई ‘अटल एक्सप्रेस’ खिलौना रेलगाड़ी, बाल नगरी (किड्स सिटी), गुब्बारा सफारी और जल विहार जैसी सुविधाओं ने इस स्थान को मनोरंजन का महातीर्थ बना दिया है।
काँकरिया केवल मनोरंजन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवसृष्टि के प्रति संवेदनशीलता का भी केंद्र है। यहाँ स्थित भारत का अग्रणी कमला नेहरू प्राणी उद्यान (काँकरिया ज़ू), सुंदर पक्षीघर और निशाचर प्राणियों का विशेष घर प्रकृति प्रेमियों के लिए अध्ययन का उत्तम स्थान है। प्रतिवर्ष दिसंबर महीने के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाला ‘काँकरिया उत्सव’ (काँकरिया कार्निवल) तो अहमदाबाद की सांस्कृतिक चेतना का महोत्सव बन जाता है, जहाँ कला, संगीत और प्रकाश-ध्वनि (लाइट एंड साउंड) के प्रदर्शन के साथ पूरा तालाब दीपोत्सव की तरह जगमगा उठता है।
समाचार पत्र के पाठकों के समक्ष यह लेख प्रस्तुत करते हुए गौरव की अनुभूति होती है कि, काँकरिया तालाब अहमदाबाद के अतीत की भव्यता और वर्तमान के प्रगतिशील विकास के मिलन का सच्चा पता है। पूर्व अहमदाबाद के इस फेफड़े के समान जलाशय के किनारे शाम के समय बहने वाली हवाएँ और पानी की लहरें आज भी अनगिनत हृदयों को मानसिक शांति और आल्हाददायक अहसास कराती हैं। हेरिटेज नगरी अहमदाबाद की यात्रा काँकरिया के दर्शन के बिना अधूरी ही मानी जाएगी।
लेखक: रूपेश सोलंकी

