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रेलवे सर्वे के नाम पर ज़मीन नापने आए सर्वेक्षकों का थेरका में आदिवासी समुदाय ने ज़ोरदार विरोध किया

पंच कृष्ण मुकाम पर ग्रामीणों की बैठक हुई: “गरीब आदिवासी किसान अपनी हक़ की ज़मीन का एक इंच भी नहीं देंगे” — आमरण अनशन समेत ज़ोरदार आंदोलन की चेतावनी

झालोद। झालोद तालुका के थेरका गाँव में रेलवे के लिए सर्वे करने आए सर्वेक्षकों को लेकर आदिवासी समुदाय में काफ़ी नाराज़गी है। आज थेरका गाँव के आदिवासी समुदाय के लोग पंच कृष्ण मुकाम पर इकट्ठा हुए और बैठक कर रेलवे सर्वे का खुलकर विरोध किया।

आदिवासी समुदाय के लोगों का कहना है कि उनकी ज़मीन उनके परिवार के लिए रोज़गार और जीविका का मुख्य स्रोत है। ऐसे में समाज में यह भावना है कि विकास के नाम पर बार-बार गरीब आदिवासी किसानों की ज़मीन पर नज़र डाली जा रही है।

कॉरिडोर, एयरपोर्ट, GIDC के बाद अब रेलवे के नाम पर ज़मीन छीनने की कोशिश?

ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय के बीच यह सवाल उठ रहा है कि पहले कॉरिडोर, एयरपोर्ट और GIDC जैसे विभिन्न प्रोजेक्ट्स के नाम पर आदिवासी समुदाय की ज़मीनें ली गईं, और अब रेलवे के नाम पर गरीब किसानों की ज़मीन छीनने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का साफ़ कहना है कि, “अगर विकास के नाम पर गरीब आदिवासी किसानों की ज़मीन छीनी गई और उन्हें अपनी ही ज़मीन से बेदखल किया गया, तो पूरा समाज एकजुट होकर इस अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ेगा।”

सरकारी पत्र में फ़ाइनल लोकेशन सर्वे और DPR तैयार करने के काम का ज़िक्र

सरकारी पत्र के अनुसार, नीमच-बांसवाड़ा-दाहोद-अलीराजपुर-नंदुरबार के बीच नई दूसरी रेलवे लाइन के लिए फ़ाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का काम M/s मोनार्क सर्वेयर्स एंड इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड, पुणे को सौंपा गया है। इस काम में इंजीनियरिंग गतिविधियाँ, ट्रैफ़िक सर्वे, ओरिजिन-डेस्टिनेशन सर्वे, कमोडिटी फ़्लो सर्वे, ट्रैफ़िक वॉल्यूम सर्वे, इंडस्ट्रियल सर्वे और ऑपरेशनल व लॉजिस्टिक्स से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करना शामिल है। इसके अलावा, सरकारी पत्र में FLS से जुड़े अन्य कामों के बारे में भी जानकारी दी गई है, जैसे कि पिलर बनाना और उन्हें सही जगह पर लगाना, जियो-टेक्निकल जांच, लेवलिंग, DGPS सर्वे, टोटल स्टेशन और ड्रोन लिडार सर्वे।

ग्रामीणों का आरोप: ड्रोन और आधुनिक उपकरणों से सर्वे और नाप-जोख

ग्रामीणों के अनुसार, यह बात सामने आई है कि इलाके की ज़मीन का सर्वे और नाप-जोख ड्रोन जैसे आधुनिक उपकरणों से किया गया है। इससे किसानों में चिंता और गुस्सा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है, “हमारी मंज़ूरी के बिना हमारी ज़मीन पर कोई भी सर्वे या नाप-जोख करना हमें मंज़ूर नहीं है।”

“हम अपनी हक़ की ज़मीन का एक इंच भी नहीं देंगे”

आज पंच कृष्ण मुकाम पर हुई बैठक में थेरका गाँव के आदिवासी समुदाय ने एकमत होकर विरोध जताया।

ग्रामीणों ने साफ़ कहा, “गरीब आदिवासी अपनी हक़ की ज़मीन का एक इंच भी नहीं देंगे। ज़मीन ही हमारा रोज़गार, जीवन और आने वाली पीढ़ी का भविष्य है।”
किसानों का कहना है कि अगर ज़मीन ले ली गई, तो खेती पर निर्भर परिवारों के रोज़गार का मुख्य ज़रिया छिन जाएगा। माँग है कि सरकार विकास के नाम पर कोई भी प्रोजेक्ट लाने से पहले गरीब किसानों और आदिवासी समुदायों के अधिकारों, जीवन और भविष्य पर विचार करे।

हिंसक आंदोलन और आमरण अनशन की चेतावनी

थेरका गाँव के आदिवासी समुदाय ने साफ़ चेतावनी दी है कि अगर उनकी ज़मीन के साथ कोई अन्याय हुआ, तो जल्द ही हिंसक आंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि ज़रूरत पड़ने पर आमरण अनशन जैसे आंदोलन भी किए जाएँगे।

विकास के नाम पर गरीब आदिवासियों की ज़मीन नहीं छीनी जाएगी — ग्रामीणों का आक्रोश

आदिवासी समुदाय के लोगों का सवाल है कि अगर हर नए प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ़ गरीब आदिवासी किसानों की ज़मीन ही ली जाएगी, तो यह विकास किसके लिए होगा?

ज़मीन छिनने के बाद किसान परिवार के रोज़गार की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

आज थेरका गाँव में हुई बैठक के बाद संकेत मिल रहे हैं कि रेलवे सर्वे के ख़िलाफ़ आदिवासी समुदाय का विरोध अब और तेज़ होगा। ग्रामीणों का साफ़ संदेश है, “ज़मीन हमारी जीवनरेखा है और हम अपनी जीवनरेखा यानी ज़मीन के लिए आखिरी साँस तक लड़ेंगे।”

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