स्थान: करजन / वडोदरा रिपोर्ट: महानगर मेट्रो विशेष डेस्क
गुजरात में शराबबंदी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाने के दावे तो अक्सर सामने आते रहते हैं, लेकिन वडोदरा जिले के करजन तालुका में कानून-व्यवस्था की जो धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वह बेहद चिंताजनक है। करजन पुलिस स्टेशन से महज २ किलोमीटर की दूरी पर स्थित करमडी गांव से लेकर क्षेत्र के करीब ९૯ गांवों में देशी-विदेशी शराब की भट्ठियां और वरली मटका का सट्टा खुलेआम चल रहा है।
स्थानीय सूत्रों और सजग नागरिकों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा अवैध कारोबार पुलिस तंत्र के कथित वहीवटदारों (वसूलीबाजों) और प्रभावशाली राजनीतिक आकाओं के संरक्षण में फल-फूल रहा है।
गांव-गांव फैला अवैध कारोबार: सिलसिलेवार ब्यौरा
करजन तालुका में विभिन्न स्थानों पर चल रहे अवैध धंधों का विवरण इस प्रकार है:
करमडी गांव: पुलिस स्टेशन से कुछ ही दूरी पर स्थित इस गांव में देशी शराब की भट्ठियां दिन-रात धधक रही हैं।
कुराली गांव (नई नगरी): पानी की टंकी के पास ‘नगीन’ नामक व्यक्ति खुलेआम वरली मटका का सट्टा खिलवा रहा है।
सापा गांव: नई वसाहत के पास इसी व्यक्ति द्वारा सट्टे का दूसरा अड्डा संचालित किया जा रहा है।
राणापुर और चीमकी गांव: स्थानीय राजनीतिक पहुंच रखने वाले सरंपच पार्थ शाह पर चीमकी गांव में विदेशी शराब की खेप उतरवाने और बिकवाने के गंभीर आरोप हैं।
कंडारी गांव: टावर के पास प्रदीप वसावा नामक व्यक्ति द्वारा अवैध अंग्रेजी शराब की आपूर्ति की जा रही है।
बारियावास: यहां परेश कांतिलाल नामक व्यक्ति अंग्रेजी शराब का कारोबार चला रहा है।
विवादित कर्मचारियों की वापसी और हर महीने करोड़ों का ‘हफ्ता राज’
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस महकमे के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं:
१. हनुभा कामडीया की भूमिका: अतीत में शराब के गंभीर मामले में नाम आने, जेल जाने और निलंबित होने के बावजूद हनुभा कामडीया नामक कर्मचारी का तबादला राजनीतिक प्रभाव से वापस करजन पुलिस स्टेशन में कराए जाने का आरोप है। आरोप है कि वह पुलिस स्टेशन के वसूली तंत्र को संभालता है।
२. एलसीबी एएसआई भूपत रबारी का प्रभाव: डभोई बीट में तैनात एएसआई भूपत रबारी द्वारा जिले की एलसीबी शाखा का कथित वसूली तंत्र संभालने की चर्चाएं पुलिस महकमे में जोरों पर हैं।
३. हफ्ते का गणित: तालुका के ९૯ गांवों से प्रति गांव १ से १.५ लाख रुपये की अवैध वसूली का अनुमान लगाया जाए, तो हर महीने करोड़ों रुपये एकत्र किए जाने का आरोप है।
‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर सवाल
गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी द्वारा अवैध गतिविधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात कही जाती है, लेकिन करजन के हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानीय स्तर पर इन निर्देशों की अनदेखी की जा रही है। युवा वर्ग इस अवैध दलदल में फंसकर प्रभावित हो रहा है और आम जनता लाचार महसूस कर रही है।
महानगर मेट्रो के सीधे सवाल – प्रशासन दे जवाब:
૧. शराब के मामले में जेल जा चुके कर्मचारी को दोबारा किस आधार पर करजन पुलिस स्टेशन में नियुक्त किया गया?
૨. थाने से महज २ किमी दूर चल रही शराब की भट्ठियां उच्च अधिकारियों की नजर से दूर कैसे हैं?
૩. क्या पुलिस विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा?
૪. अवैध गतिविधियों के कारण क्षेत्र में कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
क्षेत्र के युवाओं के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा के हित में इस अवैध नेटवर्क पर तत्काल प्रभाव से नकेल कसना अत्यंत आवश्यक है।

