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पापी का आखिरी अंत! आणंद पुलिस ने साढ़े चार साल की मासूम बच्ची के कातिल का खेल खत्म कर दिया : पुलिस पर हमला करने के बाद भागने की कोशिश कर रहा आरोपी एनकाउंटर में मारा गया!

आणंद: साढ़े चार साल की मासूम बच्ची को किडनैप करने, उसके साथ रेप करने और उसे रेलवे ट्रेन के नीचे फेंकने वाले क्रिमिनल सुरेश परमार को उसके कर्मों का आखिरी हिसाब मिल गया है। आणंद LCB और पुलिस की तुरंत कार्रवाई और बहादुरी की वजह से यह क्रिमिनल हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही खत्म हो गया।

क्या थी पूरी भयानक घटना?

18 जुलाई को वासद रेलवे स्टेशन पर अपने माता-पिता की गोद में शांति से सो रही साढ़े चार साल की मासूम बच्ची को सुरेश परमार नाम का क्रिमिनल रात के अंधेरे में उठाकर ले गया था। इस पापी ने कथित तौर पर बच्ची के साथ रेप किया और उसे चलती ट्रेन के नीचे फेंककर बहुत ही बेरहमी से मार डाला। घटना की गंभीरता को देखते हुए बोरसद ग्रामीण पुलिस और रेलवे पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाली, जिसमें पुलिस ने इस अपराधी को देखते ही कुछ ही घंटों में मुख्य आरोपी सुरेश परमार को पकड़ लिया।

उल्टी का बहाना, चप्पू से हमला और खाकी का पलटवार!

घटना तब और नाटकीय हो गई जब पुलिस टीम आरोपी सुरेश परमार को लेकर आनंद LCB ऑफिस की तरफ जा रही थी। रास्ते में शरारती आरोपी ने गाड़ी में उल्टी करने का नाटक किया और गाड़ी रोक दी। जैसे ही गाड़ी रुकी, आरोपी ने पहले से छिपाकर रखे तेज चप्पू से पुलिस टीम पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया! इस अचानक हुए हमले में दो बहादुर पुलिसकर्मी महिपाल सिंह और राजवीर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए।

PSI राणा की बहादुरी भरी फायरिंग: आरोपी नीचे गिर गया!

पुलिस पर हमला करने के बाद आरोपी ने अंधेरे का फायदा उठाकर भागने की कोशिश की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए PSI राणा ने आरोपी को बार-बार सरेंडर करने और रुकने की चेतावनी दी। लेकिन इस आरोपी को, जिसे अथॉरिटी और कानून का कोई डर नहीं था, हमला करता रहा। आखिरकार, अपनी और अपने साथी कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए PSI राणा ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से सीधे आरोपी पर गोली चला दी।

पुलिस के जवाबी हमले में आरोपी सुरेश को दो गोलियां लगीं और वह खून से लथपथ होकर ज़मीन पर गिर पड़ा। गंभीर रूप से घायल आरोपी को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

गुजरात से एक पक्का संदेश:

जिसने साढ़े चार साल की बच्ची की चीखें नहीं सुनीं, उसका भी अंत कानून की गोलियों के बीच हुआ! कुछ ही घंटों में इंसाफ दिलाकर आनंद पुलिस ने यह साबित कर दिया है कि गुजरात में बेटियों पर हाथ उठाने वाले या पुलिस पर हमला करने वाले लोगों के लिए अब सिर्फ यमलोक का रास्ता खुला है

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