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गुजरात ATS का बड़ा धमाका: टेररिस्ट मॉड्यूल ने अनजान जगहों पर बम धमाकों का टेस्ट किया, मोबाइल में ‘बम बनाने’ का PDF मिलागिरफ्तार किए गए साजिशकर्ताओं का खतरनाक प्लान: एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड ने जिहादी लिटरेचर और IED मटीरियल के साथ पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया

गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को राज्य के सिक्योरिटी सिस्टम को लेकर एक बड़ी कामयाबी मिली है। गुजरात में एक्टिव टेररिस्ट मॉड्यूल का पर्दाफाश करने के बाद ATS की पूछताछ में ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिससे सिक्योरिटी एजेंसियां ​​भी हैरान हैं। गिरफ्तार किए गए साजिशकर्ता न सिर्फ प्लानिंग कर रहे थे, बल्कि उन्होंने राज्य में अनजान जगहों पर बम धमाकों का लाइव ट्रायल भी किया है, ATS ने सनसनीखेज दावा किया है।

मोबाइल बने सबूत: डिजिटल मटीरियल जब्त

ATS के ऑफिशियल सोर्स से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की गहन साइंटिफिक जांच की गई। इस जांच के दौरान आरोपियों के डिवाइस से बेहद आपत्तिजनक मटीरियल मिला। मुख्य रूप से:
बम बनाने का तरीका बताने वाली सीक्रेट गाइड और PDF फाइलें।
कट्टरपंथी विचार फैलाने वाले जिहादी साहित्य और वीडियो।

IED (IED – इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) तैयार करने के लिए टेक्निकल मटीरियल और डेटा।

इन सभी सबूतों से यह साफ है कि आरोपी एक बड़ी और भयानक आतंकवादी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।

दुर्गम जगहों पर ब्लास्ट की टेस्टिंग

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि आरोपियों ने लोकल लेवल पर मिलने वाले केमिकल और मटीरियल का इस्तेमाल करके छोटे साइज़ के IED तैयार किए थे। किसी को शक न हो, इसके लिए उन्होंने शहर या गांव से दूर जंगल जैसी या बंजर और दुर्गम जगहों को चुना था। वहां, उन्होंने कई बार छोटे और बड़े ब्लास्ट करके बम की क्षमता का परीक्षण किया, ताकि मुख्य टारगेट पर कोई चूक न हो।

खूनी खेल खेलने की क्या योजना थी?

ATS की शुरुआती जांच के अनुसार, इस मॉड्यूल का मुख्य मकसद राज्य की शांति और सुरक्षा को बाधित करना था। शक है कि वे भीड़भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों, धार्मिक स्थलों या महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों को निशाना बनाकर कई ब्लास्ट करने की साजिश रच रहे थे। साजिश करने वाले लोकल लेवल पर युवाओं को गुमराह करके इस स्लीपर सेल नेटवर्क को बढ़ाना चाहते थे।

नेटवर्क कितना बड़ा है? पुलिस एक्शन मोड में

अभी, ATS की अलग-अलग टीमें जांच कर रही हैं कि यह पूरा टेररिस्ट मॉड्यूल किसके कहने पर काम कर रहा था और क्या इसके तार बॉर्डर पार या दूसरे राज्यों से जुड़े हैं। इस बात की पूरी संभावना है कि आने वाले दिनों में आरोपियों को फंडिंग कहां से मिल रही थी और इस नेटवर्क में और कितने लोकल लोग शामिल हैं, इसका सुराग मिलने से और गिरफ्तारियां होंगी। गुजरात ATS की इस समय पर की गई कार्रवाई से एक बड़ी टेररिस्ट घटना टल गई है।

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