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अहमदाबाद में मौत का आंकड़ा: पटाखा फैक्ट्री में धमाके के लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार? डेढ़ साल से रिहायशी इलाके के बीच चल रही थी गैर-कानूनी फैक्ट्री!

प्रशासन की मीठी निगाहों के नीचे मौत का खेल: बेकसूर लोगों की जान जाने के बाद ही भ्रष्ट अधिकारी क्यों जागते हैं? लोगों के गुस्से के बीच ‘पाको गुजरात न्यूज़’ का एक ज्वलंत सवाल

गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद एक बार फिर पटाखा फैक्ट्री से बम जैसे धमाके से दहल गई है। अहमदाबाद के एक रिहायशी इलाके के बहुत करीब मौजूद एक पटाखा फैक्ट्री में हुए बड़े धमाके में बेकसूर मजदूरों और आसपास के लोगों की मौत हो गई है। यह घटना सिर्फ एक ‘हादसा’ नहीं, बल्कि प्रशासन की मिलीभगत और बड़ी लापरवाही से हुई ‘इंसानों की बनाई आपदा’ है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि मौत की यह फैक्ट्री पिछले डेढ़ साल से बिना किसी परमिशन या फायर सेफ्टी इक्विपमेंट के चल रही थी!

डेढ़ साल तक सिस्टम कुंभकर्ण की नींद में क्यों सोया रहा? इस भयानक धमाके के बाद, आम लोग और पीड़ितों के परिवार वाले अब एक ही सवाल पूछ रहे हैं – “यह किसकी लापरवाही है?” पटाखे बनाने का इतना बड़ा काला धंधा डेढ़ साल से रिहायशी इलाके के इतने पास चल रहा था, जहाँ सैकड़ों परिवार रहते हैं, लेकिन लोकल पुलिस, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) और फैक्ट्री इंस्पेक्टर डिपार्टमेंट को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? क्या अधिकारी शराब तस्करों और गैर-कानूनी फैक्ट्री मालिकों से रेगुलर ‘एडमिनिस्ट्रेशन’ लेकर आँखें मूंद रहे थे? ऐसे गंभीर आरोप अब लोकल लोग खुलेआम लगा रहे हैं। धमाका इतना ज़ोरदार था कि आस-पास की धरती हिल गई। लोकल चश्मदीदों के मुताबिक, फैक्ट्री में लगी आग और उसके बाद हुआ धमाका इतना भयानक था कि आस-पास की बिल्डिंगों की खिड़कियाँ टूट गईं और पूरा आसमान काले धुएं से ढक गया। अंदर काम कर रहे मज़दूरों को बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिला। बताया जा रहा है कि डेढ़ साल से लोकल लोगों ने इस फैक्ट्री के खतरे के बारे में कई बार ज़ुबानी तौर पर बताया है, लेकिन करप्शन की आड़ में बैठे ज़िम्मेदार लोगों ने कोई एक्शन नहीं लिया, जिसका नतीजा आज यह भयानक मौत है।

क्या सिर्फ़ कागज़ों पर जांच होगी या जेल भी होगी?

हमेशा की तरह, घटना के बाद पुलिस और बड़े अधिकारियों का काफ़िला मौके पर पहुंचा है और FSL की मदद से जांच का ड्रामा शुरू हो गया है। क्या फैक्ट्री मालिक के ख़िलाफ़ केस दर्ज करना ठीक माना जाएगा या डेढ़ साल तक इस गैर-कानूनी धंधे को दबाने वाले करप्ट सरकारी अधिकारियों पर भी IPC की सख़्त धाराओं के तहत केस दर्ज करके जेल भेजा जाएगा?

जब तक ऐसे घोटालेबाज़ों और लापरवाह अधिकारियों को मौत या उम्रकैद की सज़ा नहीं मिलती, अहमदाबाद और गुजरात में बेगुनाह लोगों की ज़िंदगी ऐसे ही जलती रहेगी। ‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ इस मुद्दे पर सिस्टम से सुलगते सवाल पूछता रहेगा जब तक पीड़ितों को इंसाफ़ नहीं मिल जाता।

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