गणेश महोत्सव के लिए बिना लाइसेंस के शुरू किया था मौत का काला धंधा: दाहोद से गरीब मजदूरों को लाकर किया गया काम, अब इन्वेस्टर्स और जमीन मालिकों पर पुलिस की नजर
अहमदाबाद के रामोल इलाके में एक गैर-कानूनी पटाखा फैक्ट्री में हुए भयानक ब्लास्ट के मामले में पुलिस ने आखिरकार सख्त कार्रवाई की है। बेगुनाह मजदूरों की जान लेने वाले इस दिल दहला देने वाले ब्लास्ट केस में रामोल पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी समेत 3 बड़े लोगों को गिरफ्तार किया है जो सीधे तौर पर इस जुर्म में शामिल थे। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य मास्टरमाइंड मेहुल डोडिया, उसकी मां रमीलाबेन डोडिया और उसका साथी सादिक सैयद शामिल हैं। खाकी की इस कार्रवाई से मौत के गैर-कानूनी धंधे में शामिल लोगों में दहशत फैल गई है।
लाइसेंस नहीं था, फिर भी लालच में फैक्ट्री शुरू कर दी!
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, उनसे सिस्टम के सिक्योरिटी सिस्टम पर बड़े सवाल उठते हैं। मुख्य आरोपी मेहुल डोडिया को आने वाले गणेश उत्सव के लिए पटाखों का एक बड़ा ऑर्डर मिला था। इस ऑर्डर को पूरा करने और लाखों कमाने के लिए मेहुल ने सारे कानून और नियमों को नज़रअंदाज़ कर दिया था। उसके पास पटाखे बनाने या एक्सप्लोसिव सामान रखने का कोई लीगल लाइसेंस नहीं था। फिर भी, उसने अपनी मां रमीला और सादिक सैयद की मदद से यह फैक्ट्री एक रिहायशी इलाके के पास चलाई थी।
दाहोद के गरीब मजदूरों को बनाया बलि का बकरा
आरोपियों ने कम पैसे में ज़्यादा काम करवाने के लालच में दाहोद के अंदरूनी इलाकों से गरीब मजदूरों को अहमदाबाद बुलाया था। बिना किसी सेफ्टी किट, फायर NOC या ट्रेनिंग के इन मजदूरों से एक्सप्लोसिव पाउडर और केमिकल से पटाखे बनाने का काम शुरू करवा दिया गया। आरोपियों की इस बड़ी लापरवाही की वजह से आखिरकार वही हुआ जिसका डर था। एक छोटी सी चिंगारी एक बड़े धमाके में बदल गई और गरीब मजदूर जलकर मर गए।
इन्वेस्टर और पर्दे के पीछे के खिलाड़ी कौन हैं? रामोल पुलिस इन तीनों मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे डालकर संतुष्ट नहीं है। अब पुलिस इस काले धंधे की जड़ तक पहुंचने के लिए जांच कर रही है। जिस ज़मीन पर यह गैर-कानूनी फैक्ट्री चल रही थी, उसका मालिक कौन है? और वे असली इन्वेस्टर कौन हैं जिन्होंने इस फैक्ट्री को शुरू करने के लिए बड़ी रकम की फंडिंग की? पुलिस ने उस दिशा में जांच शुरू कर दी है ताकि पता चल सके कि इस पापी धंधे में उनका कितना हाथ है।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ सवाल पूछता है कि ऐसे लालची बूटलेगर और बिना लाइसेंस के फैक्ट्री चलाने वालों को सख्त से सख्त सज़ा कब मिलेगी? फैक्ट्री मालिकों के साथ-साथ उन ज़िम्मेदार सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कब होगी जिन्होंने इस इलाके की जांच नहीं की? हम अपने पाठकों को पूरे मामले से अपडेट रखेंगे।

