कानून लागू करने वाले खुद ही नंगे लुटेरे बन गए; सूरत के लोगों में गुस्सा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ, और खाकी वर्दी की इज्जत खराब हुई
सूरत : स्मार्ट सिटी सूरत से खाकी वर्दीधारी को शर्मसार करने और जनता को खुलेआम लूटने का एक बहुत ही शर्मनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सूरत में, ट्रैफिक पुलिस ने हर दिन गाड़ी चलाने वालों से जुर्माना वसूलने या टो करने के कथित ‘टारगेट’ को पूरा करने के लिए नैतिकता की सारी हदें पार कर दी हैं। नो-पार्किंग के नाम पर, इस बात के पक्के सबूत हैं कि ट्रैफिक पुलिस के जवानों और क्रेन वालों ने खुद खड़ी गाड़ियों को पीली लाइन से बाहर निकाला और फिर उनकी फोटो खींचकर उन्हें टो कर दिया। जैसे ही इस पूरी हरकत का वीडियो वायरल हुआ, सूरत के लोगों में भारी गुस्सा फैल गया।
गाड़ी लाइन में थी, लेकिन क्रेन वाले ने कहा – ‘आज का टारगेट अभी बाकी है!’
मिली जानकारी के मुताबिक, सूरत के एक बिज़ी इलाके में, गाड़ी चलाने वालों ने सड़क के किनारे सरकार की बनाई पीली लाइन (सफेद/पीली पट्टी) के अंदर अपने टू-व्हीलर डिसिप्लिन में पार्क किए थे। कानून के मुताबिक, ये गाड़ियां पार्किंग ज़ोन में मानी जाती हैं। लेकिन, वहां टक्कर मारने वाले ट्रैफिक पुलिस के क्रेन वालों ने जो शर्मनाक हरकत की, वह कैमरे में कैद हो गई। क्रेन वालों ने पहले इधर-उधर देखा और फिर लाइन के अंदर पड़ी बाइक को पकड़कर खुद घसीटते हुए पीली लाइन के बाहर नो-पार्किंग ज़ोन में डाल दिया! फिर, जैसे उन्होंने कोई बड़ा जुर्म पकड़ लिया हो, उसकी फोटो खींची और बाइक को क्रेन पर चढ़ा दिया।
क्या यह जुर्माना वसूली है या सीधी-सीधी वसूली?
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और लोग ट्रैफिक पुलिस की बुराई कर रहे हैं।
‘महानगर मेट्रो’ सूरत ट्रैफिक पुलिस के बड़े अधिकारियों से तीखे सवाल पूछता है:
क्या पुलिस को आम जनता से अपनी ड्यूटी में ढील दिलाने के लिए ऐसी गंदी हरकतें करने का अधिकार दिया गया है? अगर गाड़ी चलाने वाले कानून का पालन भी करें, तो नियम बनाने का क्या मतलब है?
क्रेन कॉन्ट्रैक्टर और भ्रष्ट पुलिसवालों के बीच यह ‘टारगेट सिस्टम’ किसके कहने पर चल रहा है?
क्या अब खाकी जागेगी या क्रेन कॉन्ट्रैक्टर को बचाएगी?
इस पूरी घटना से यह साबित होता है कि सूरत में ट्रैफिक रेगुलेशन का मकसद अब व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि किसी भी कीमत पर जनता से पैसे ऐंठना बन गया है। वीडियो के पक्के सबूत सामने आने के बाद अब पूरे शहर की नज़र इस बात पर है कि सूरत पुलिस कमिश्नर इस मामले में क्या सख्त कदम उठाते हैं। क्या जुर्म करने वाले क्रेन ड्राइवर और वहां मौजूद जिम्मेदार ट्रैफिक पुलिसवालों को सस्पेंड करके कानूनी FIR दर्ज की जाएगी? जनता अब सदमे में है और इस तरह के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है!

