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शरद पवार नाराज, सोनम वांगचुक के अनशन तुड़वाने के तरीके पर भड़के, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को बताया गैरजिम्मेदाराना

पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना की। शरद पवार ने इस कदम को गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने दावा किया कि सरकार छात्रों की वास्तविक मांगों पर ध्यान देने के बजाय मूकदर्शक बनी रही।

पुणे: दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करा दिया है। सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती कराने पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए इसे ‘गुंडागर्दी’ और ‘तानाशाही’ करार दिया है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना की। शरद पवार ने इस कदम को गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने दावा किया कि सरकार छात्रों की वास्तविक मांगों पर ध्यान देने के बजाय मूकदर्शक बनी रही।

शरद पवार ने क्या कहा?

शनिवार को बारामती में पत्रकारों से बातचीत में शरद पवार ने कहा कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर सरकार ने वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। दरअसल वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने कहा कि यह कदम चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया। वांगचुक और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन कार्यकर्ता नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और इस विवाद के कारण कथित तौर पर कुछ छात्रों की मौत के विरोध में 28 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

सरकार मूकदर्शक बनी रही-पवार

शरद पवार ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस स्थिति को सावधानीपूर्वक नहीं संभाला, जिसका असर कई छात्रों के भविष्य पर पड़ा। सरकार मूकदर्शक बनी रही, जबकि अन्य राजनीतिक दल उनके (वांगचुक के) समर्थन में आगे आए। कांग्रेस और सुप्रिया सुले सहित एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने वहां (जंतर-मंतर) जाकर एक साझा मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह मांग वास्तविक थी और छात्रों के हित में थी, लेकिन दिल्ली में मौजूद होने के बावजूद सरकार का कोई भी नेता प्रदर्शन स्थल पर नहीं गया।

गैर-जिम्मेदार है सरकार

शरद पवार ने कहा कि इसका मतलब है कि सरकार गैर-जिम्मेदार है। यह मुद्दा यहीं समाप्त नहीं होगा। संसद का सत्र शुरू होने वाला है और वहां भी इस पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि वांगचुक पर कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। दिल्ली हाईकोर्ट वांगचुक की चिकित्सकीय स्थिति की निगरानी कर रहा है और उसने निर्देश दिया है कि उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए। डॉक्टरों ने शुक्रवार को बताया था कि भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से वांगचुक का वजन लगभग 9.5 किलोग्राम घट गया है। हालांकि, वांगचुक ने कहा था कि बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद वह अपना अनशन जारी रखने के लिए दृढ़ हैं।

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