कानून के रक्षक ही भक्षक बन गए हैं? कोर्ट के साथ खेल खेलना मुश्किल हो गया है; पुलिस फोर्स में खूब बकझक हो रही है
पोरबंदर: जब वही बड़े पुलिस अधिकारी जिन पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वही कानून का मजाक उड़ाने लगें, तो जनता न्याय के लिए कहां जाए? पोरबंदर से एक बहुत ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है जो खाकी वर्दी को शर्मसार करता है। फैमिली कोर्ट ने पोरबंदर के तत्कालीन डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DySP), पुलिस इंस्पेक्टर (PI) और एक हेड कांस्टेबल (HC) के खिलाफ केस दर्ज करने का ऐतिहासिक और सख्त आदेश जारी किया है, जिन्होंने एक दोषी आरोपी को बचाने और कोर्ट को गुमराह करने के लिए अपनी पावर का गलत इस्तेमाल किया। कोर्ट के इस सख्त रवैये से पुलिस फोर्स में सन्नाटा छा गया है।
क्या है पूरा मामला? कोर्ट के साथ खेला गया खेल!
मिली जानकारी के मुताबिक, एक मेंटेनेंस केस में फैमिली कोर्ट ने आरोपी को सज़ा सुनाई थी और उसे जेल भेजने का आदेश दिया था। कानून के मुताबिक, पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेजना था। लेकिन, आरोप है कि पोरबंदर के इन बड़े पुलिस अधिकारियों ने अपनी पावर का गलत इस्तेमाल किया और आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने के बजाय उसे बचाने की साज़िश रची। इतना ही नहीं, आरोपी पकड़ा नहीं गया या फिर दूसरे बहानों से माननीय कोर्ट के सामने झूठी रिपोर्ट पेश करके कोर्ट को गुमराह करने की भयानक कोशिश की गई।
कोर्ट लालघूम: “कानून से ऊपर कोई नहीं”
जब यह पूरा मामला फैमिली कोर्ट के सामने आया और पुलिस अधिकारियों की इन काली करतूतों का खुलासा हुआ, तो कोर्ट ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया। कोर्ट ने साफ शब्दों में चिंता जताई कि अगर न्याय की रक्षा करने वाले ही आरोपी के साथ साज़िश करेंगे, तो आम आदमी का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। कोर्ट ने तुरंत प्रभाव से ज़िम्मेदार DySP, PI और हेड कांस्टेबल के खिलाफ कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज करने और आगे की जांच करने का आदेश दिया है। ‘पाको गुजरात’ का ज्वलंत सवाल – वसूली या सिफारिश?
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पुलिस सिस्टम में भ्रष्टाचार और सांठगांठ किस हद तक फैल चुकी है।
एक आम अपराधी को बचाने के लिए DySP और PI लेवल के अधिकारी मैदान में क्यों उतरे?
क्या इसके पीछे कोई बड़ा फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (वसूली) था या कुछ राजनीतिक आकाओं की सिफारिश थी?
क्या पोरबंदर पुलिस अब अपने ही साथी भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच करेगी?
कोर्ट के इस आदेश के बाद देखना होगा कि होम डिपार्टमेंट और पुलिस प्रशासन इन दागी अधिकारियों के खिलाफ किस तरह के सस्पेंशन के कदम उठाता है। ‘महानगर मेट्रो ‘ जनता को भरोसा दिलाता है कि हम खाकी की आड़ में चल रहे ऐसे काले धंधों की खबरें फैलाते रहेंगे!

