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सुप्रिया सुले के बाद अब संजय राउत का भी यू टर्न, परिसीमन बिल पर मोदी सरकार को सपोर्ट के दिए संकेत

नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की प्रखर विरोधी शिवसेना UBT ने परिसीमन बिल पर सरकार को शर्तों के साथ समर्थन करने की घोषणा कर राजनीतिक जगत को चौंका दिया है. शिवसेना UBT के पास लोकसभा में 9 सांसद थे, लेकिन पार्टी में ताजा बगावत के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ मात्र 3 सांसद रह गए हैं.

लोकसभा में परिसीमन बिल पास कराने में जुटी नरेंद्र मोदी सरकार को एक तगड़ा सपोर्ट मिला है. केंद्र की नीतियों का प्रखर विरोध करने वाली शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी परिसीमन बिल का सपोर्ट कर सकती है. गुरुवार को उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां प्रस्तावित परिसीमन बिल का विरोध करेंगी, लेकिन अगर सरकार उनके सुझाए गए संशोधनों को शामिल करती है, तो वे समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं.

बुधवार को NCP SP की नेता सुप्रिया सुले ने भी कहा था कि सरकार अगर उनकी मांग मानती है तो उनकी पार्टी इस बिल का लोकसभा में समर्थन कर सकती है.

सुप्रिया सुले के बाद संजय राउत की ओर से भी परिसीमन बिल पर पॉजिटिव बयान आया है. संजय राउत नागपुर में पत्रकारों से बात कर रहे थे. शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी के खिलाफ सेना (UBT) का ‘राम रक्षा आंदोलन’ होने वाला है, उसी के सिलसिले में वे यह बात कह रहे थे.

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खास बात यह है कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बुधवार को कहा कि अगर परिसीमन बिल – जो NDA सरकार का एक अहम विधायी एजेंडा है – सभी राज्यों में सीटों में एक समान 50 प्रतिशत बढ़ोतरी पर आधारित है, तो “इसका विरोध करने का कोई खास कारण नहीं होगा.” हालांकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे प्रस्ताव का समर्थन करने का कोई भी फ़ैसला विपक्षी INDIA गठबंधन के भीतर चर्चा के बाद ही लिया जाएगा.

सरकार संसद के मॉनसून सत्र में, जो 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, संविधान (131वां संशोधन) बिल लाने जा रही है. इस बिल में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव है.

परिसीमन बिल पर सपोर्ट पर विचार करेंगे

सुले की टिप्पणियों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में राउत ने कहा कि अभी इस बारे में कोई फ़ैसला नहीं हुआ है कि यह बिल इस सत्र में पेश किया जाएगा या नहीं. “जब बिल आएगा, तो हम सब बैठकर फ़ैसला करेंगे और आगे क्या करना है, इस पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा.”

उन्होंने कहा, “लेकिन आज आप जो खबरें फैला रहे हैं कि पार्टी (NCP-SP) में टूट होगी और बहुमत दिखाने के लिए विधायकों और सांसदों को तोड़ा जाएगा, वगैरह-वगैरह, इन बातों का कोई आधार नहीं है.”

राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने आगे कहा कि वे परिसीमन बिल का विरोध करेंगे, लेकिन अगर उनके सुझावों के अनुसार इसमें ज़रूरी संशोधन किए जाते हैं, तो विपक्ष इस पर “विचार कर सकता है.”

मंगलवार रात NCP (SP) नेता जयंत पाटिल की फडणवीस के साथ हुई मुलाक़ात और शरद पवार की पार्टी के BJP के नेतृत्व वाले सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल होने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर, राउत ने कहा कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक, पाटिल अपने चुनाव क्षेत्र से जुड़े किसी मुद्दे पर CM से मिलने गए थे.

पाटिल NCP (SP) के एक अहम सदस्य और विपक्षी महा विकास अघाड़ी के प्रमुख नेता हैं. उन्होंने कहा, “आप जो कह रहे हैं, उसमें से मुझे कुछ भी सच नहीं लगता.”

राउत ने दावा किया कि Sena (UBT) और NCP (SP) के बारे में अफ़वाहें सत्ताधारी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना फैला रही है ताकि मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके.

संजय राउत नेता ने कहा कि उन्होंने सुले से बात की है और वह गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बारे में साफ़ तौर पर बताएंगी.

शिवसेना UBT के पास 3 सांसद

लोकसभा में इस वक्त शिवसेना UBT के 6 सांसद रह गए हैं. 2024 के चुनाव में शिवसेना UBT के 9 सांसद जीते थे. इनमें से हाल ही में 6 सांसद टूटकर एकनाश शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए. इस तरह से शिवसेना UBT के 3 सांसद बच गए हैं.

अगर ये तीन सांसद भी लोकसभा में मोदी सरकार को समर्थन देते हैं तो केंद्र सरकार को परिसीमन बिल पास कराने के जरूरी दो तिहाई बहुमत में से सिर्फ 3 सांसदों की कमी रह जाएगी.

मोदी सरकार को दो तिहाई बहुमत के लिए अब 3 की जरूरत

बता दें कि इससे पहले जब परिसीमन से जुड़ा बिल लोकसभा में पेश किया गया था तो इसके समर्थन में 298 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े थे. लेकिन तब मोदी सरकार को इस बिल को पास कराने के लिए 352 सांसदों का समर्थन चाहिए था.

अब के सियासी माहौल में इसी नंबर को आधार बनाकर चलें तो 540 सांसदों की लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के बहुमत की जरूरत होगी.

हाल के घटनाक्रमों के बाद बीजेपी इस आंकड़े के करीब पहुंचती दिख रही है.

इसे ऐसे समझें. NDA को पिछली बार इस बार 298 वोट मिले थे. इस 298 वोट को कायम माने तो बीजेपी को इस बिल को पास कराने के लिए 60 सांसदों के समर्थन की और आवश्यकता होगी.

इस 60 को बीजेपी कैसे हासिल करेगी ये समझें. तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद, उद्धव गुट से शिवसेना में गए 6 सांसद और NCP पवार गुट के 8 सांसदों का सपोर्ट होता है. इसका योग 332 होता है. इसमें अगर 22 सांसद DMK के भी जुड़ जाते हैं तो ये आंकड़ा 332+22= 354 हो जाता है. अब NDA को मात्र 6 और सांसदों की जरूरत पड़ेगी.

और अब शिवसेना (UBT) भी सरकार को शर्तों के साथ सपोर्ट करने पर विचार कर रही है. इस तरह आंकड़ा 357 हो जाता है. NDA सरकार को अब 3 और सांसदों की जरूरत है. हालांकि यहां यह बताना जरूरी है कि DMK ने सरकार को समर्थन पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

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