भरूच : जीते-जीते सरकारी सिस्टम और नेताओं की परेशानी तो झेलनी ही पड़ती है, लेकिन अब भरूच जिले के झगड़िया में ऐसे हालात बन गए हैं, जहां मरने के बाद भी आजादी पाने के लिए भ्रष्टाचार के सिस्टम से लड़ना पड़ रहा है। झगड़िया के माधी गांव में नर्मदा किनारे लाखों रुपये खर्च करके बनाया गया श्मशान आज खुद प्रशासन की बड़ी लापरवाही और लालीवाड़ी के कारण मरणासन्न हालत में पहुंच गया है। 30 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद हालात ऐसे हैं कि मृतकों को अंतिम संस्कार और दाह संस्कार के लिए नर्मदा नदी के खुले किनारे पर बैठना पड़ रहा है। पानी में पैसा: मेन कॉन्ट्रैक्टर काम अधूरा छोड़कर भाग गया, सब-कॉन्ट्रैक्टर ने ली छलांग
भरूच ज़िला पंचायत ने किसानों की ज़मीन एक्वायर करके 30 लाख रुपये से ज़्यादा की ग्रांट दी। मकसद था कि मढ़ी और उसके आस-पास के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए अच्छी सुविधाएँ मिलें। लेकिन इस प्रोजेक्ट की शुरुआत से ही करप्शन की अफवाह थी। मेन कॉन्ट्रैक्टर काम अधूरा छोड़कर दिवालिया हो गया। उसके बाद, सब-कॉन्ट्रैक्टर ने जैसे-तैसे काम पूरा किया, लेकिन इस श्मशान घाट को अभी तक फ़ाइनल टच नहीं दिया गया है। करोड़ों रुपये के टैक्स के पैसे से बनी यह बिल्डिंग मेंटेनेंस के अभाव में जर्जर होकर गिर गई है।
मानसून में चिता कहाँ जलाएँ? जनता का सिस्टम से सुलगता सवाल
अभी तो लोग नर्मदा नदी के खुले किनारे पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं, लेकिन असली मुसीबत तो मानसून में आती है। जब नदी में बाढ़ की हालत हो और ऊपर से भारी बारिश हो रही हो, तो किसी अपने की लाश का अंतिम संस्कार कहाँ करें? यह बड़ा यक्ष प्रश्न स्थानीय लोगों को परेशान कर रहा है। इतनी गंभीर समस्या होने के बावजूद मोटी चमड़ी वाले प्रशासन की आँखें नहीं खुल रही हैं।
यह कोई सुविधा नहीं है, यह जनता के पैसे के साथ सरासर अन्याय है। अब लोगों में बहुत गुस्सा है और बस यही मांग है कि इस अधूरे और फर्जी काम को तुरंत पूरा किया जाए और भ्रष्ट बाबुओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद प्रशासन जागेगा या यह श्मशान घाट भी लोगों की उम्मीदों की तरह नर्मदा के पानी में डूब जाएगा?
रिपोर्ट: रंगुनी ज़ाकिर, भरूच

