गांधीनगर : गुजरात सरकार ने प्रॉपर्टी की गैर-कानूनी खरीद-बिक्री और गुजरात में आबादी का संतुलन बिगाड़ने वाले तत्वों के खिलाफ कानूनी ढांचे को और मजबूत किया है। राज्य सरकार ने सालों पुराने और विवादित ‘अशांतधारा’ कानून में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब से, ‘अशांतधारा’ शब्द कानूनी सरकारी किताबों से हटा दिया जाएगा और इसकी जगह इसे ज्यादा प्रोफेशनल और सख्त नाम ‘स्पेसिफाइड एरिया’ के नाम से जाना जाएगा। सरकार ने नए नोटिफिकेशन जारी करके प्रॉपर्टी ट्रांसफर के प्रोसेस को बेहद सख्त बना दिया है।
नए कानून के मजबूत हथियार: लालीवाड़ी अब नहीं चलेगा!
सरकार ने प्रॉपर्टी हड़पने वालों और गैर-कानूनी जमीन सौदों पर रोक लगाने के लिए ये नए नियम लागू किए हैं:
‘स्पेसिफाइड एरिया’ की ऑफिशियल घोषणा: सरकार अब किसी भी सेंसिटिव एरिया को ‘स्पेसिफाइड एरिया’ घोषित कर सकेगी। सुपर कमेटी बनेगी: कानून को लागू करने और मॉनिटर करने के लिए एक पावरफुल ‘मॉनिटरिंग एंड एडवाइजरी कमेटी’ बनाई जाएगी।
कलेक्टर लेवल पर सख्त जांच: अब से किसी भी प्रॉपर्टी डील से पहले कलेक्टर लेवल पर डिटेल में जांच ज़रूरी कर दी गई है।
गलत काम करने वालों के लिए मुसीबत: SIT का गठन: अगर प्रॉपर्टी ट्रांसफर में कोई धोखाधड़ी या दबाव की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच सीधे एक खास तौर पर बनाई गई SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) करेगी।
गैर-कानूनी ट्रांसफर सीधे कैंसिल होंगे: सरकार बिना इजाज़त या गैर-कानूनी तरीके से की गई सभी प्रॉपर्टी डील को सीधे रद्द घोषित कर देगी।
6 महीने के अंदर पैसा वापस करने का सख्त नियम: अगर कोई ट्रांसफर गैर-कानूनी पाया जाता है, तो बेचने वाले को सिर्फ़ 6 महीने के अंदर खरीदार को पूरी रकम वापस करनी होगी।
ऐसे हो गए हैं लैंड माफिया: सरकार का दावा
नए नोटिफिकेशन के बारे में सरकारी हलकों का कहना है कि इन बदलावों के बाद, कानूनी कमियों का इस्तेमाल करके मुश्किल इलाकों में प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों को उनकी सही जगह पर लाया जाएगा। इन बदलावों से गैर-कानूनी लैंड डील पूरी तरह से रुक जाएंगी और आम नागरिकों के हितों की रक्षा होगी। अब देखना यह है कि कागज़ पर मज़बूत दिखने वाला यह नया ‘स्पेसिफाइड एरिया’ एक्ट ज़मीनी स्तर पर कितना असरदार साबित होता है और यह लैंड माफिया के मंसूबों पर कितना पानी फेरता है!

