ऑफिस के बाहर यमराज जैसे मार्शल तैनात, वीडियो बनाते समय मोबाइल फोन निकालने की धमकी: सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कौन सा स्कैम छिपाने की कोशिश कर रहा है?
सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के मुगलिसारा हेड ऑफिस से एक चौंकाने वाली और डेमोक्रेसी को खत्म करने वाली खबर सामने आई है, जिससे चौथा पिलर माने जाने वाले मीडिया जगत में गुस्सा फैल गया है। अब कमिश्नर और अधिकारियों के कहने पर सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफिस में पत्रकारों और कैमरामैन की एंट्री पर सख्त बैन लगा दिया गया है। पत्रकारों को पब्लिक इशू और करप्शन की रिपोर्ट कवर करने से रोकने के लिए ऑफिस के दरवाजे पर बाउंसर जैसे प्राइवेट मार्शल तैनात कर दिए गए हैं।
सूरत से यह खास और सनसनीखेज रिपोर्ट देखें…
सत्ता का नशा या पाप छिपाने की नाकाम कोशिश?
अभी तक सरकारी ऑफिस पब्लिक और मीडिया के लिए खुले थे, लेकिन सूरत म्युनिसिपैलिटी के हुक्मरानों ने ऑफिस को प्राइवेट एस्टेट समझ लिया है। मुगलिसारा ऑफिस में कोई भी पत्रकार कैमरा या माइक्रोफोन ID लेकर अंदर न आ सके, इसके लिए मेन गेट पर मार्शलों का कड़ा पहरा लगा दिया गया है। अगर कोई पत्रकार ग्राउंड लेवल की सच्ची रिपोर्ट दिखाने के लिए वीडियो बनाने की कोशिश करता है, तो ये मार्शल डराने-धमकाने लगते हैं और मोबाइल कैमरे छीनने की कोशिश करते हैं।
पत्रकारों को रोककर किसे बचाने का यह खेल चल रहा है?
सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में करोड़ों रुपये के टेंडर, भ्रष्टाचार के मामले और अधिकारियों की लापरवाही अक्सर मीडिया में सामने आती रहती है। अब सवाल यह उठता है:
ऑफिस में यह क्या पक रहा है? इसे मीडिया और जनता की नज़रों में आने से रोकने के लिए कौन इतनी छोटी-मोटी कोशिशें कर रहा है?
प्राइवेट मार्शलों की सैलरी किसकी जेब में जाती है? जनता के टैक्स के पैसे से रखे गए मार्शलों का इस्तेमाल जनता की आवाज़ दबाने के लिए क्यों किया जा रहा है?
यह ऑर्डर देने वाला असली बॉस कौन है? कमिश्नर या कोई नेता, जिसके कहने पर सूरत म्युनिसिपैलिटी में इस तरह की तानाशाही चल रही है?
मीडिया न डरेगा, न झुकेगा! लोकतंत्र में जनता की आवाज़ उठाना मीडिया का संवैधानिक अधिकार है। कोई भी अधिकारी या शासक ऐसे मार्शल खड़े करके या
धमकी देकर अपने काले कारनामों को ज़्यादा समय तक नहीं छिपा पाएगा। इस मुद्दे पर सूरत शहर के पत्रकार संगठनों में काफ़ी गुस्सा है और संकेत हैं कि आने वाले दिनों में इस तानाशाही फ़ैसले के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किए जाएँगे। अब देखना यह है कि विरोध के तूफ़ान के बीच भी सूरत नगर निगम कमिश्नर इस बेढंगे और गैर-संवैधानिक फ़ैसले को वापस लेंगे या अपनी ज़िद पर अड़े रहेंगे।

