Homeभारतगुजरातगांधी के गुजरात में किसान अडानी के खिलाफ़ दंगा करने लगे: 'अडानी,...

गांधी के गुजरात में किसान अडानी के खिलाफ़ दंगा करने लगे: ‘अडानी, अपने घर के सामने एक खंभा लगाओ, हमें परेशान मत करो!’

मोरबी कलेक्टर के ऑफिस में गूंज: जेटपार के किसानों की बड़ी रैली, महिलाओं का गुस्सा—’हम भूखे-प्यासे बैठे रहे, लेकिन सरकार ने कोई रहम नहीं दिखाया’
मोरबी से गुस्से और आक्रोश के ऐसे नज़ारे सामने आए हैं जो किसी भी सेंसिटिव इंसान को हिलाकर रख देंगे। जेटपार इलाके के किसान और महिलाएं अडानी ग्रुप द्वारा किसानों की कीमती ज़मीन पर बिजली लाइन के खंभे बनाने के खिलाफ़ लड़ाई लड़ रहे हैं। “अडानी, अपने घर के सामने एक खंभा लगाओ, हमें परेशान मत करो!”—यह कोई आम नारा नहीं है, यह अपनी मिट्टी और वजूद बचाने की कोशिश कर रहे एक किसान परिवार का गुस्सा है।

चिलचिलाती गर्मी में, भूखे-प्यासे इंसाफ के लिए संघर्ष कर रहे इन परिवारों की आवाज़ें गांधीनगर के बहरे कानों तक क्यों नहीं पहुँचतीं? यही बड़ा सवाल है।
देखें हमारी खास रिपोर्ट…

ग्राउंड रिपोर्ट: किसान विकास की कीमत क्यों चुकाते हैं?

मोरबी के जेतपार पंथक में अडानी कंपनी द्वारा लगाए जा रहे हाई-टेंशन पावर लाइन टावरों का लंबे समय से ज़बरदस्त विरोध हो रहा है। अब किसान इन खंभों के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं, जो खेती लायक उपजाऊ ज़मीन का सीना चीरकर लगाए जा रहे हैं। यह गुस्सा सिर्फ़ खेतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब एक बड़ी रैली के रूप में मोरबी कलेक्टर ऑफिस तक पहुंच गया है और प्रशासन को घेरने की कोशिश की गई है।

महिलाओं की पीड़ा: “सरकार ने दया नहीं दिखाई”

इस आंदोलन की सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि पुरुषों के साथ-साथ घर की महिलाएं भी सड़क पर उतर आई हैं। कलेक्टर ऑफिस के बाहर विरोध कर रही एक महिला ने अपने दिल की बात कहते हुए कहा:

“हम कई दिनों से भूखे-प्यासे इंसाफ के लिए यहां बैठे हैं। हमारे छोटे-छोटे बच्चे परेशान हैं, लेकिन इस अंधी-बहरी सरकार को हम पर ज़रा भी दया नहीं आ रही है। यह ज़मीन हमारी मां है, और हम इस पर अडानी के खंभे नहीं लगने देंगे!”

मुख्य सवाल जो सिस्टम पर उंगली उठाते हैं:

विकास किसके खर्चे पर? प्राइवेट कंपनियों के करोड़ों के प्रोजेक्ट्स के लिए दुनिया के अमीरों के हितों की बलि क्यों दी जा रही है?
पुलिस फोर्स का गलत इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है? अपने हक के लिए आवाज उठा रहे शांति से काम कर रहे किसानों के खिलाफ पुलिस फोर्स का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
सरकार चुप क्यों है? किसानों की भलाई की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सरकार अडानी के प्रोजेक्ट्स के खिलाफ गरीब किसानों की गुहार सुनने को तैयार क्यों नहीं है?

बिगड़ैल तो पहले ही बज चुकी है!

जेतपार के किसानों ने साफ कह दिया है कि या तो इस लाइन का रूट बदला जाए या कोई दूसरा रास्ता निकाला जाए। अगर खड़ी फसलों को जबरदस्ती झुकाकर खंभे लगाने की कोशिश की गई तो किसान अपनी जान देने को तैयार हैं लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना यह है कि मोरबी एडमिनिस्ट्रेशन और गुजरात सरकार इन गरीब किसानों का गला घोंटेगी या सत्ता के बल पर पूंजीपतियों का साथ देगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments