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साबरमती नदी के तल में ‘फ़िल्मी स्टाइल’ में ज़बरदस्त पीछा: साबरकांठा-मेहसाणा बॉर्डर पर पुलिस और मिनरल माफ़िया के बीच ज़बरदस्त भिड़ंत, पूरे इलाके में हड़कंप!

यह किसी हॉलीवुड या बॉलीवुड एक्शन फ़िल्म की शूटिंग नहीं है, बल्कि साबरमती नदी के तल में खुलेआम प्राकृतिक संसाधनों की लूट करने वाले आदतन मिनरल माफ़िया को पकड़ने के लिए खेला गया मौत का असली खेल है! साबरकांठा और मेहसाणा ज़िलों की सीमा पर अवैध रेत खनन में शामिल माफ़िया को पकड़ने के लिए प्रशासन और पुलिस द्वारा चलाए गए इस ज़बरदस्त ऑपरेशन के दृश्यों ने सभी को दहला दिया है। दिल की धड़कनें बढ़ा देने वाले इस पीछा करने के दौरान, पूरे इलाके में भारी तनाव और डर का माहौल फैल गया।

‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ की यह सनसनीखेज ग्राउंड रिपोर्ट…

नदी के तल में एक काला पीछा: ऐसे दृश्य जो किसी फ़िल्म को भी टक्कर दे दें

मिली जानकारी के अनुसार, साबरमती नदी के प्रतिबंधित इलाकों से रात के अंधेरे और दिन के उजाले में करोड़ों रुपये की रेत चोरी करने का काला धंधा लंबे समय से चल रहा था। जब टीम जानकारी मिलने पर इन माफ़ियाओं को पकड़ने के लिए मौके पर पहुँची, तो सरेंडर करने के बजाय माफ़ियाओं ने अपने भारी वाहनों और डंपरों को पूरी रफ़्तार से चलाना शुरू कर दिया।

पुलिस और प्रशासन ने इन माफ़ियाओं का पीछा करने के लिए अपने वाहन नदी के तल में ही खड़े कर दिए थे। धूल भरी आँधी और पानी की तेज़ लहरों के बीच यह ‘ज़बरदस्त पीछा’ घंटों तक चलता रहा। वाहनों को आमने-सामने से टक्कर मारने और कुचलने की कोशिशों के बीच पूरे ज़िले में डर फैल गया।

सीमा विवाद का फ़ायदा उठाने वाले माफ़ियाओं का खेल खत्म!

यह घटना साबरकांठा और मेहसाणा ज़िलों के सीमावर्ती इलाके में हुई। आमतौर पर, मिनरल माफ़िया दो ज़िलों के बीच की सीमा का फ़ायदा उठाते हैं और एक ज़िले की पुलिस के आने पर दूसरे ज़िले में भाग जाते हैं। लेकिन इस बार सिस्टम सख़्त मूड में था। सभी रास्तों को बंद करके माफ़िया को घेर लिया गया। इस ऑपरेशन के वीडियो फ़िलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और ट्रेंड कर रहे हैं।

महानगर मेट्रो न्यूज़ की राय:

साबरमती नदी के बीचों-बीच जिस तरह से अवैध खनन किया जा रहा है, वह पर्यावरण और सरकारी खजाने दोनों के लिए एक बड़ा नुकसान है। ये माफ़िया इतने बेखौफ़ हो गए हैं कि उन्हें कानून या पुलिस का कोई डर नहीं है। पुलिस का यह ज़बरदस्त ऑपरेशन तारीफ़ के काबिल है, लेकिन सवाल यह है कि किसके समर्थन से ये माफ़िया इतनी बड़ी मशीनरी को नदी में उतारने की हिम्मत करते हैं? क्या इसमें किसी स्थानीय नेता या अधिकारी की मिलीभगत है? इन सभी बातों की अच्छी तरह से जाँच होनी चाहिए और पकड़े गए माफ़िया के ख़िलाफ़ इतनी सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिए कि दोबारा कोई भी नदी की तलहटी की तरफ़ आँख उठाकर देखने की हिम्मत न करे!

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