जनता के पैसे से सुविधा के नाम पर सरकार कैसा भ्रष्ट प्रशासन चलाती है, इसका एक जीता-जागता उदाहरण डभोई तालुका से सामने आया है। डभोई से सिरोला तक करोड़ों रुपये की लागत से नई सड़क और नाला बनाने का काम हाल ही में पूरा हुआ है। भले ही सरकार और नेता करोड़ों की लागत से सड़क बनाने के लिए अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन ठेकेदारों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत और भारी लापरवाही के कारण करोड़ों की यह सड़क अब वाहन चालकों के लिए मौत का जाल साबित हो रही है।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ के पास इस मामले पर एक गंभीर और खतरनाक रिपोर्ट है…
नियमों का मज़ाक: झील के किनारे नाला तो बना दिया, लेकिन सुरक्षा रेलिंग लगाना भूल गए!
मुख्य समस्या डभोई तालुका के सथोड गांव के पास पैदा हुई है। सथोड गांव के पास सड़क के ठीक बगल में एक बड़ी और गहरी झील है। नई सड़क इसी झील के किनारे से गुजरती है और वहां एक बड़ा नाला (गटर) बनाया गया है।
सरकारी नियमों में स्पष्ट कहा गया है कि जहां झील, नदी या गहरी घाटी जैसा खतरनाक हिस्सा हो, वहां सड़क के दोनों ओर मजबूत सुरक्षा दीवार या लोहे की सुरक्षा रेलिंग (क्रैश बैरियर) बनाना अनिवार्य है। लेकिन यहां भ्रष्टाचार की बू ऐसी है कि ठेकेदार ने नाले के आगे-पीछे या झील के किनारे किसी भी तरह की रेलिंग नहीं लगाई है। ठेकेदार ने सड़क को खुला छोड़कर और बिल पास करवाकर मनमानी की है।
रात में हादसा: बाइक सवार सीधे झील में गिरे!
स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। रात में इस सड़क से गुजरना मौत के मुंह में जाने जैसा है। सड़क पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग नहीं है और अंधेरे में झील या नाले का किनारा बिल्कुल दिखाई नहीं देता। नतीजतन, नई सड़क बनने के बाद से कई मोटरसाइकिल सवार बिना किसी चेतावनी के सीधे झील में गिर चुके हैं। गनीमत है कि अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन कई युवा गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
ग्रामीणों का अहम सवाल: क्या किसी की मौत होने पर ही सिस्टम जागेगा? सथोड गाँव के लोग पूछ रहे हैं, “हम नई सड़क बनने से खुश थे, लेकिन बिना रेलिंग वाली यह नाली कभी भी किसी की जान ले सकती है। रात में यहाँ से गुज़रना डरावना होता है। क्या सिस्टम किसी बड़े हादसे या किसी बेगुनाह नागरिक की मौत का इंतज़ार कर रहा है?”
अगर भविष्य में यहाँ कोई बड़ा हादसा होता है और किसी का परिवार बर्बाद हो जाता है, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार होगा? AC केबिन में कुंभकर्ण की तरह सो रहे सरकारी अधिकारी या वह भ्रष्ट ठेकेदार जिसने सारा पैसा डकार लिया?
महानगर मेट्रो न्यूज़ की राय:
करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क लोगों की भलाई के लिए होनी चाहिए, न कि उनकी मौत का कारण बनने के लिए। सथोड गाँव के पास सुरक्षा नियमों को जिस तरह से नज़रअंदाज़ किया गया है, वह एक अक्षम्य अपराध है। सड़क और भवन विभाग के आला अधिकारियों को तुरंत जागना चाहिए, इस ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना चाहिए और 24 घंटे के भीतर इस नाली पर मज़बूत लोहे की रेलिंग लगवानी चाहिए। जनता के टैक्स का पैसा सड़क पर बर्बाद हो और जनता खुद परेशान हो, इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता!

