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डभोई के कुकड़ गांव में प्रशासन की भारी लापरवाही: दिशा और मोड़ बताने वाले साइन बोर्ड एक महीने से ज़मीन पर पड़े हैं – अंधेरे में मौत का जाल!

क्या सरकारी अधिकारी कभी AC ऑफिस से बाहर निकलकर हालात का जायज़ा लेंगे? सड़क और भवन विभाग शायद किसी बड़े हादसे और किसी बेगुनाह की मौत का इंतज़ार कर रहा है!

डभोई : डभोई तालुका के कुकड़ गांव की मुख्य सड़कों पर सरकारी प्रशासन की ऐसी भारी लापरवाही और सुस्ती सामने आई है, जो किसी भी समय किसी बेगुनाह वाहन चालक की जान ले सकती है। कुकड़ गांव के पास बहुत ज़रूरी मोड़ों (curves) और गांव का नाम बताने वाले मुख्य साइन बोर्ड पिछले एक महीने से टूटे हुए और ज़मीन पर पड़े हैं। इस गंभीर मामले को एक महीना बीत जाने के बाद भी, सड़क और भवन विभाग (रोड डिपार्टमेंट) के अधिकारियों को कोई चिंता नहीं है! किसी भी भ्रष्ट या सुस्त अधिकारी ने सड़क किनारे धूल फांक रहे इस बोर्ड को दोबारा लगाने की ज़हमत नहीं उठाई, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों में सिस्टम के खिलाफ़ काफी गुस्सा है।

रात के अंधेरे में मौत का सफ़र: अनजान वाहन चालक फंसे

दिन के समय तो सड़क का रास्ता समझ आ जाता है, लेकिन रात के घने अंधेरे में इस सड़क से गुज़रने वाले अनजान वाहन चालकों के लिए स्थिति बेहद गंभीर और खतरनाक हो जाती है। सड़क पर खतरनाक मोड़ों को बताने वाले साइन बोर्ड न होने के कारण, रात में तेज़ी से आने वाले वाहन चालकों को पता नहीं चलता कि मोड़ कहाँ है। हेडलाइट की रोशनी में भी साइन बोर्ड दिखाई न देने के कारण, यहाँ गंभीर दुर्घटना की पूरी संभावना बनी रहती है।

मुश्किल यह भी है कि कुकड़ गांव का नाम बताने वाला मुख्य बोर्ड भी ज़मीन पर पड़ा है, इसलिए बाहर से आने वाले यात्रियों या रिश्तेदारों को यह पता नहीं चल पाता कि वे किस गांव में आए हैं। नतीजतन, अनजान लोग रात में सड़कों पर भटकते रहते हैं और उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

जनता का अहम सवाल: सरकारी अधिकारी AC केबिन से बाहर कब निकलेंगे?

प्रशासन की इस अनदेखी और लापरवाही के खिलाफ़ अब स्थानीय लोगों में तीखी नाराज़गी और गुस्सा है। ग्रामीण पूछ रहे हैं, “क्या सरकार से लाखों रुपये की सैलरी पाने वाले ज़िम्मेदार अधिकारी कभी अपने AC दफ़्तरों से बाहर निकलकर ग्रामीण इलाकों का दौरा करते हैं?”

अगर ये अधिकारी सच में कागज़ों पर दिखाए गए अनुसार फ़ील्ड विज़िट कर रहे हैं, तो उन्हें सड़क के किनारे एक महीने से कचरे की तरह पड़े ये बोर्ड क्यों नहीं दिखते? क्या ये बाबू अंधे हैं या जान-बूझकर सोए हुए हैं? प्रशासन की यह घोर लापरवाही साफ़ करती है कि उन्हें जनता की जान की कोई परवाह नहीं है। क्या सड़क और आवास विभाग इस सड़क पर किसी भयानक हादसे और किसी नागरिक की मौत का इंतज़ार कर रहा है? स्थानीय लोगों ने अब चेतावनी दी है कि अगर इस बोर्ड को तुरंत दोबारा नहीं लगाया गया, तो सबसे ऊँचे स्तर पर कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा।

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