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करोड़ों खर्च करने के बाद भी राजली गाँव ‘नरक’ बन गया है: ग्रामीण 3 साल से गंदगी और कचरे के बीच रहने को मजबूर! क्या सरपंच और तलाटी की कुंभकर्ण जैसी नींद किसी की मौत का इंतज़ार कर रही है?

एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत मिशन के लिए करोड़ों रुपये का अनुदान इस्तेमाल कर रही है और कागजों पर डिजिटल और साफ़-सुथरे गाँवों का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ डभोई तालुका के राजली गाँव में स्थानीय प्रशासन की भारी लापरवाही और सुस्ती का ऐसा मामला सामने आया है जिसे देखकर गुस्सा आ जाता है। राजली गाँव के निवासी पिछले तीन साल से नरक जैसी ज़िंदगी जीने को मजबूर हैं। गाँव के एक खास इलाके में पूरे गाँव का कचरा और जानवरों का गोबर खुलेआम लोगों के घरों के ठीक बगल में फेंका जा रहा है। इतना ही नहीं, सीवर से बहने वाला गंदा पानी भी इसी कचरे के ढेर में डाला जा रहा है, जिससे पूरा रिहायशी इलाका मच्छरों और ज़हरीले कीड़ों का अड्डा बन गया है। ‘पक्को गुजरात’ आज इस सोए हुए प्रशासन की आँखें खोलने के लिए ज़मीनी हकीकत की रिपोर्ट पेश कर रहा है।

सत्ता के नशे में चूर सरपंच और तलाटी का झगड़ा

स्थानीय परेशान निवासियों के गुस्से का ज्वालामुखी अब फूट पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, वे पिछले 3 साल से इस सिरदर्द पैदा करने वाली बदबू और नरक जैसे माहौल से छुटकारा पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। गाँव के सरपंच और तलाटी (पंचायत मंत्री) से कई बार व्यक्तिगत रूप से, मौखिक और लिखित रूप में शिकायतें की गई हैं। इसके बावजूद, AC कमरों और सत्ता के नशे में चूर स्थानीय प्रशासन पर कोई असर नहीं हो रहा है। जनता के टैक्स के पैसे से वेतन पाने वाले अधिकारी ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे वे गाँव के गरीब लोगों को कीड़े-मकोड़े समझ रहे हों।

मासूम बच्चों की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़

गंदगी के इस आलम के कारण इलाके में ज़हरीले मच्छरों और कीड़ों का आतंक इतना बढ़ गया है कि घरों में रहना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के घरों में छोटे-छोटे मासूम बच्चे हैं, जो चौबीसों घंटे इस प्रदूषित और ज़हरीले माहौल में साँस लेने को मजबूर हैं। गाँव वालों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आने वाले दिनों में यहाँ कोई भयानक महामारी फैलती है और किसी बेगुनाह की जान जाती है, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार होगा? वह आलसी सरपंच, गंदे पानी का टैंकर या AC केबिन में बैठा डभोई का तालुका प्रशासन?

‘महानगर मेट्रो ‘ की ओर से सीधे और तीखे सवाल:

सफ़ाई के नाम पर लूट-खसोट करने वाले प्रशासन को राजली गाँव के इस नरक जैसे हालात क्यों नहीं दिखते?
3 साल तक गुहार लगाने के बावजूद, सरपंच और तलाटी क्यों चुपचाप बैठे हैं?
क्या सिस्टम तब अपनी आँखें खोलेगा जब कोई बड़ी महामारी फैल जाएगी और लोग अस्पतालों में जमा होने लगेंगे?
गाँव वालों की आखिरी चेतावनी: अब आर-पार की लड़ाई होगी!

राजली गाँव के परेशान निवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूँक दिया है। गाँव वाले ज़ोरदार माँग कर रहे हैं कि घरों के पास जमा इस कचरे को जल्द से जल्द हटाया जाए और सीवेज के पानी का स्थायी समाधान किया जाए। अगर इस गंभीर मुद्दे का तुरंत समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में पूरा गाँव उच्च स्तर पर गुहार लगाने और ‘गांधी चिंध्या’ (गांधीवादी तरीके) से उग्र आंदोलन व तालाबंदी करने को मजबूर होगा, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी डभोई तालुका प्रशासन की होगी।

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