जूनागढ़/वेरावल : जूनागढ़ में भारी बारिश ने प्रशासन के प्री-मॉनसून प्लान को बिगाड़ दिया है। सौराष्ट्र के दो सबसे बड़े धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाला सोमनाथ-द्वारका नेशनल हाईवे भारी बारिश के कारण मगरमच्छ की पीठ जैसा हो गया है। हाईवे पर इतने भयानक गैप हैं कि यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि यह सड़क है या गड्ढा। इस हाईवे पर कल देर रात से एक किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लगा हुआ है, जिसमें हजारों वाहन चालक और तीर्थयात्री आधी रात से भूखे-प्यासे फंसे हुए हैं।
आसमान से दिखा तबाही का मंजर: ड्रोन से ली गई तस्वीरें सामने आईं
इस कुदरती आफत और प्रशासन की लापरवाही की असली तस्वीर तब सामने आई जब ड्रोन कैमरे से ली गई पूरी स्थिति की चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। ड्रोन फुटेज में साफ दिख रहा है कि पूरा नेशनल हाईवे गाड़ियों की लंबी कतारों से जाम है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे देखकर ऐसा लग रहा है जैसे किसी जंग के मैदान में बमबारी हुई हो! करोड़ों की लागत से बने हाईवे की ऐसी दुर्दशा देखकर लोगों में भारी गुस्सा है।
नींद से जागा प्रशासन: नेशनल हाईवे अथॉरिटी भाग रही है
मीडिया में भारी हंगामे और खबरों के बाद, नेशनल हाईवे अथॉरिटी आखिरकार अपनी नींद से जागी है। सड़क पर इस गंभीर स्थिति को हल करने के लिए, युद्ध स्तर पर गड्ढे भरने का काम शुरू हो गया है। JCB और मजदूरों की फौज लगाकर सड़क की मरम्मत की योजना बनाई जा रही है, ताकि घंटों से फंसे ट्रैफिक को जल्द से जल्द आसान बनाया जा सके।
ज्वलंत सवाल: हर साल करोड़ों रुपये टोल टैक्स वसूलने वाली कंपनियां पहली ही बारिश में बेबस क्यों हो जाती हैं?
‘महानगर मेट्रो ‘ के तीखे सवाल:
नेशनल हाईवे बनाने में ऐसा कौन सा मटीरियल इस्तेमाल किया गया कि नॉर्मल बारिश में हाईवे बह गया? मानसून से पहले बड़ी-बड़ी बातें करने वाला हाईवे अथॉरिटी का एडमिनिस्ट्रेशन कल रात कहाँ गायब था?
आधी रात से परेशान छोटे बच्चों और परिवारों के साथ यात्रियों की बुरी हालत के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
सड़कों को पक्का करके तुरंत राहत तो मिल जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सड़कें आने वाली बारिश झेल पाएंगी? ‘पाको गुजरात’ लोगों के हक के लिए अधिकारियों से ऐसे ही तीखे सवाल पूछता रहेगा।

