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भोपाल जेल में बंद पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घर में घुसे चोरों का CCTV आया सामने, इत्मीनान से चोरी करते दिखे, गन और गहने गायब

मध्यप्रेश के भोपाल के हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में नया सस्पेंस गहरा गया है। जेल में बंद पूर्व जज के सीलबंद घर में हुई रहस्यमयी चोरी का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद मृतका के परिवार ने सबूत मिटाने की साजिश का आरोप लगाया है।

भोपाल: बागमुगलिया एक्सटेंशन स्थित जेल में बंद पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घर का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जहां 12 मई को पूर्व मॉडल ट्विशा की लाश मिली थी। फुटेज में साफ दिख रहा है कि 28 जून की तड़के कुछ नकाबपोश चोर पहली मंजिल पर स्थित पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ के बेडरूम में घुसे और बेहद इत्मीनान से मोबाइल टॉर्च की रोशनी में अलमारियां खंगालते रहे।

यह कोई साधारण चोरी नहीं दिख रही है। चोरों ने जल्दबाजी करने के बजाय दराजों और अलमारियों के सामान की बारीकी से जांच की। इस घटनाक्रम के बाद भोपाल सेंट्रल जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुईं पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने कोर्ट से पुलिस बयान दर्ज करने की गुहार लगाई, जिसका सीबीआई ने कड़ा विरोध किया है।

मृतका के फौजी भाई ने जताया सबूत मिटाने का शक

सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा और उनके सेना अधिकारी भाई हर्षित ने इस चोरी के समय पर गहरे सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि यह जांच को प्रभावित करने और डिजिटल या भौतिक साक्ष्यों को मिटाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।

पुलिस के मुताबिक, तड़के 5 बजे गश्ती टीम ने तीन संदिग्धों को देखा था, जिनमें से दो भाग निकले और तीसरे के पास से एक बैग मिला। इस बैग में पूर्व जज के पिता की पुरानी पुश्तैनी लाइसेंसी रिवॉल्वर और कुछ चांदी के जेवर थे, जो वर्तमान में उनके बड़े बेटे और एयरफोर्स के स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ सिंह के नाम पर दर्ज है।

कस्टडी 14 जुलाई तक बढ़ी, डिजिटल सबूतों पर फंसा पेंच

सीबीआई ने स्थानीय अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी अधूरी है और दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद कोर्ट ने मां-बेटे की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ा दी। इसके साथ ही, सीबीआई ने कोर्ट में दो बेहद अहम अर्जियां लगाई हैं। फोरेंसिक टीम आरोपी समर्थ सिंह के जब्त लैपटॉप को अनलॉक नहीं कर पा रही है, जिसके लिए पासवर्ड की मांग की गई है। साथ ही, केस से जुड़े कुछ बेहद संवेदनशील ऑडियो क्लिपिंग्स की पुष्टि के लिए आरोपियों के वॉयस सैंपल लेकर वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफी टेस्ट कराने की इजाजत मांगी गई है।

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