सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाकर पिंगरवाडा में खोदे गए 50 फीट गहरे मौत के कुएं; कल तक रिक्शा चलाने वाला ‘घुंघा भरवाड़’ आज अरबपति कैसे बना? फर्जी किसान घोटाले पर क्यों खामोश बैठे हैं कलेक्टर और एसडीएम? ₹8 करोड़ के टेंडर फिक्सिंग और हर महीने करोड़ों की हफ्ताखोरी का सबसे बड़ा पर्दाफाश!

करजण/वडोदरा, महानगर मेट्रो ब्यूरो:
गुजरात सरकार भले ही राज्य में ‘कानून के राज’ और जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीटती रहे, लेकिन वडोदरा जिले का करजण तालुका इस वक्त किसी कानून से नहीं, बल्कि खालिस ‘माफियाराज’ और गुंडागर्दी के दम पर चल रहा है। करजण विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अक्षय पटेल और करजण नगरपालिका के सदस्य गोकुल भरवाड़ उर्फ ‘घुंघा’ की तानाशाही इस कदर बढ़ चुकी है कि पूरा प्रशासनिक अमला इन माफियाओं के आगे घुटने टेक चुका है। मुख्यमंत्री के सीधे नियंत्रण में आने वाले खान एवं खनिज विभाग (Mining Department) के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए यह तिकड़ी खुलेआम चुनौती दे रही है कि, “करजण हमारा है और राज भी हम ही करेंगे!”
प्रकृति की क्रूर लूट: 50 लाख मीट्रिक टन रेत की डकैती!
करजण के पिंगरवाडा गांव में पिछले कुछ सालों से प्राकृतिक संपदा का बेरहमी से दोहन किया जा रहा है। सरकारी नियमों के मुताबिक लीज पर केवल 10 फीट तक ही खुदाई की जा सकती है, लेकिन यहां विधायक के वरदहस्त से 30 से 35 जगहों पर 50 फीट से भी ज्यादा गहरे कटीले और जानलेवा गड्ढे खोद दिए गए हैं। सासरोद से नारेश्वर रोड पर करीब 50 लाख मीट्रिक टन रेत का अवैध पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। 150 से अधिक आईवा डंपर, 25 जेसीबी, 15 हिताची और बाज़ मशीनें दिन-रात करजण की धरती का सीना चीरकर सरकारी राजस्व को चूना लगा रही हैं।

कल का रिक्शावाला आज का अरबपति: ‘फर्जी किसान’ बनने का काला खेल
राजनीतिक आकाओं का हाथ सिर पर हो तो कोई रंक भी कैसे राजा बन सकता है, इसका जीता-जागता सबूत है ‘घुंघा भरवाड़’। कल तक रिक्शा चलाकर बमुश्किल अपनी आजीविका चलाने वाला घुंघा आज अरबों रुपयों की संपत्ति का मालिक कैसे बन बैठा? पूरे करजण में धौंस और धमकियों के दम पर साम्राज्य चलाने वाले घुंघा पर ‘फर्जी किसान’ बनने का बेहद गंभीर आरोप है। करजण के ईमानदार तहसीलदार (मामलतदार) ने जांच के बाद उसके किसान बनने के आवेदन को खारिज कर दिया था। लेकिन फिर ऐसा कौन सा बड़ा ‘आर्थिक सेटिंग’ हुआ कि तत्कालीन एसडीएम (SDM) ने रातों-रात उसकी अर्जी मंजूर कर उसके पूरे परिवार को कागजों पर किसान बना दिया! किसान बनने की आड़ में पिंगरवाडा गांव में करोड़ों रुपये की बेनामी जमीनें खरीदी गईं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की गवाही देती हैं।
टेंडरिंग में गुंडागर्दी: इंजीनियर विक्रम राणा की गंदी भूमिका
भ्रष्टाचार का यह दीमक सिर्फ अवैध खनन तक ही सीमित नहीं है। करजण नगरपालिका में सड़क निर्माण के लिए जारी किए गए करीब ₹8 करोड़ के ऑनलाइन टेंडर में भी भारी धांधली हुई है। नगरपालिका के इंजीनियर विक्रम राणा ने कथित तौर पर नमकहरामी करते हुए ऑनलाइन आवेदन करने वाले अन्य सभी ठेकेदारों (Contractors) का सीक्रेट डेटा लीक करके घुंघा भरवाड़ के चरणों में रख दिया। इसके बाद घुंघा ने उन ठेकेदारों को जान से मारने की धमकी देकर अपने आवेदन वापस लेने पर मजबूर किया, ताकि यह 8 करोड़ का मलाईदार टेंडर उसके अपने गुर्गों को मिल सके।
हफ्ताखोरी का ‘सिंडिकेट’: कलेक्टर से लेकर गांधीनगर तक बह रही है गंगा!
इतना बड़ा काला कारोबार बिना पुलिस, प्रशासन और माइनिंग विभाग की मिलीभगत के मुमकिन ही नहीं है। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, गांधीनगर स्थित खान-खनीज विभाग के आला अफसरों, वडोदरा कलेक्टर, स्थानीय माइनिंग अधिकारियों, करजण एसडीएम शिवम बारिया, मामलतदार पढियार, स्थानीय डीवाईएसपी (DySP) और वडोदरा जिला ट्रैफिक पीआई (PI) तक इस पाप की कमाई का हिस्सा हर महीने पहुंचता है। ट्रैफिक पुलिस की देविराज चेकपोस्ट से सरेआम अवैध वसूली होती है और पीआई को हर महीने ₹2.25 लाख का फिक्स बंडल डिलीवर किया जाता है। इसके अलावा, तालुका में चलने वाले अवैध जुए और शराब के अड्डों से दीक्षित पटेल, ऋषि पटेल और घुंघा भरवाड़ के जरिए सीधे विधायक अक्षय पटेल तक लाखों का हफ्ता पहुंच रहा है।
महानगर मेट्रो का सीधा सवाल: मुख्यमंत्री जी, इन माफियाओं के आगे आपका बुल्डोजर पंचर क्यों है?
देश का आम नागरिक अपने खून-पसीने की कमाई से टैक्स भरता है जिससे इन सरकारी बाबुओं को मोटी सैलरी और एसी केबिन मिलते हैं, इसके बावजूद ये अधिकारी अपनी ईमानदारी बेचकर माफियाओं के तलवे चाट रहे हैं। ‘महानगर मेट्रो’ सीधे तौर पर सूबे के मुख्यमंत्री और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी से तीखा सवाल करता है—क्या इन रेत माफियाओं के अवैध साम्राज्य पर कानून का बुल्डोजर चलेगा? क्या इन फर्जी किसानों की बेनामी संपत्तियां जब्त कर इन्हें जेल की सलाखों के पीछे धकेला जाएगा? अगर इस मामले पर तत्काल उच्च स्तरीय जांच समिति नहीं बैठाई गई, तो यह साफ हो जाएगा कि इस महा-लूट में ऊपर से लेकर नीचे तक सब भागीदार हैं। जनता सब देख रही है और अब इन भ्रष्टाचारियों के लिए ‘दिल्ली’ बहुत ज्यादा दूर नहीं है!

