भोपाल नगर निगम के फायर सेफ्टी ऑडिट में 90 प्रतिशत इमारतों में सुरक्षा इंतजाम फेल मिले हैं। इसके बाद हमीदिया अस्पताल, तुलसी टावर और 39 कोचिंग सेंटरों को नोटिस थमाया गया है।
एमपी नगर और न्यू मार्केट सहित कई इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी
भोपाल: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी आग के बाद भोपाल नगर निगम पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। नगर निगम के फायर विभाग ने पूरे शहर में एक व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाया है। इस कड़े निरीक्षण के बाद बीएमसी ने नियमों का उल्लंघन करने पर गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हमीदिया अस्पताल, तुलसी टावर और कान्हा टावर जैसी 10 हाई-राइज इमारतों और 39 कोचिंग संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई एमपी नगर, पिपलानी, न्यू मार्केट और बैरागढ़ जैसे व्यस्त इलाकों में की गई।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
नगर निगम के फायर विभाग की इस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद डरावने हैं। पूरे शहर में अब तक करीब 80 कोचिंग संस्थानों और कई बहुमंजिला इमारतों का बारीकी से निरीक्षण किया गया है। इनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा जगहों पर या तो आग से निपटने के इंतजाम पूरी तरह नदारद मिले या फिर जो सिस्टम लगे थे, वे काम नहीं कर रहे थे। गौरतलब है कि भोपाल में करीब 300 कोचिंग संस्थान चल रहे हैं, जिनमें लगभग ढाई लाख छात्र अपनी पढ़ाई के लिए रोज़ आते हैं।
लगभग 39 कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी उपकरण चालू हालत में नहीं पाए गए।
कई कोचिंग संस्थानों में वेंटिलेशन यानी हवा आने-जाने की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी।
छात्रों के आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता मिला, जो नियमों के खिलाफ है।
कई नामी बहुमंजिला इमारतों के पास अनिवार्य ‘फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ तक नहीं था।
हमीदिया अस्पताल के सिर्फ दो ब्लॉकों में ही अग्निशमन यंत्र चालू हालत में मिले।
मरीजों और छात्रों की सुरक्षा भगवान भरोसे
बीएमसी के फायर सेफ्टी इन-चार्ज सौरभ पटेल के मुताबिक, हमीदिया अस्पताल के बाकी हिस्सों में सुरक्षा इंतजाम बेहद खराब पाए गए हैं। ऐसी स्थिति में अगर अस्पताल में कभी आग लगती है, तो गंभीर रूप से भर्ती मरीजों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालना डॉक्टरों और स्टाफ के लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसी वजह से अस्पताल प्रबंधन को सख्त चेतावनी के साथ नोटिस भेजा गया है। प्रशासन का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर लोगों की जान जोखिम में डालने वाली इन इमारतों पर आगे भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

