मध्यप्रदेश के सिवनी के लखनादौन में प्रशासनिक नाकामी का बड़ा मामला सामने आया है। यहां की तत्कालीन सीएमओ गीता वाल्मीकि को अपने ही घर में दूषित पानी की समस्या के लिए सीएम हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ा है।
सिवनी: जिले की लखनादौन नगर परिषद में स्थानीय प्रशासनिक ढर्रे और शिकायत निवारण प्रणाली की पोल खोलने वाला एक दिलचस्प और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां की तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी गीता वाल्मीकि को अपने ही घर में आ रहे दूषित पेयजल की समस्या से निजात पाने के लिए सीधे सीएम हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यह वाकया स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि जब शहर की व्यवस्था संभालने वाले पूर्व अधिकारी ही अपनी शिकायतें सामान्य तरीके से हल नहीं करवा पा रहे हैं, तो आम जनता की क्या स्थिति होगी।
वार्ड नंबर 4 का मामला
पूरा मामला लखनादौन नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 4 का है, जहां सीएमओ गीता वाल्मीकि का निजी निवास है। वर्तमान में वे जिले की ही छपारा नगर परिषद में सीएमओ के पद पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं, लेकिन लखनादौन में घर होने के कारण वे यहीं निवास करती हैं। मिली जानकारी के अनुसार, उनके घर में पिछले काफी समय से नलों के माध्यम से गंदे और प्रदूषित पानी की सप्लाई की जा रही थी। स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद गंभीर इस समस्या को लेकर उन्होंने पहले नगर परिषद के संबंधित प्रभारियों और कर्मचारियों को मौखिक रूप से कई बार टोका और इसे दुरुस्त करने को कहा।
पूर्व सीएमओ ने लखनादौन नगर परिषद के जिम्मेदार कर्मचारियों को पहले व्यक्तिगत तौर पर अवगत कराया था।
स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने और कोई ठोस कार्रवाई न होते देख उन्होंने आखिरकार सरकारी शिकायत पोर्टल का रुख किया।
जो अधिकारी खुद रोजाना सैकड़ों लोगों की समस्याओं का समाधान करवाते हैं, उन्हें अपनी बुनियादी जरूरत के लिए परेशान होना पड़ा।
वर्तमान में छपारा में पदस्थ होने के बावजूद लखनादौन प्रशासन के ढीले रवैये से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
इस वाकये के बाद अब पूरे सिवनी जिले के प्रशासनिक हलकों में लखनादौन नगर परिषद की किरकिरी हो रही है।
स्थानीय प्रशासन पर उठे सवाल
यह अनोखा मामला सामने आने के बाद अब शिकायत निवारण तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। जानकारों का कहना है कि जो सिस्टम अपने ही विभाग के एक वर्तमान वर्ग-2 के अधिकारी की बुनियादी समस्या को हल करने में नाकाम रहा, वह आम नागरिकों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कड़ा रुख अपनाता है और वार्ड नंबर 4 के नागरिकों को साफ पानी कब तक नसीब होता है।

