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3 गोलियां खाकर भी आतंकी को मार गिराया, CRPF कमांडो संजय तिवारी का हुआ ग्रैंड वेलकम

शौर्य चक्र से सम्मानित सीआरपीएफ कमांडो संजय तिवारी के रीवा पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया. डेल्ही गांव निवासी संजय को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अदम्य साहस दिखाने के लिए यह सम्मान मिला है. मुठभेड़ में तीन गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और एक आतंकी को मार गिराया.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों शौर्य चक्र से सम्मानित होने के बाद सीआरपीएफ कमांडो संजय तिवारी अपने गृह जिला रीवा पहुंचे, जहां उनका भव्य और भावनात्मक स्वागत किया गया. रीवा रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर देश के इस वीर सपूत का अभिनंदन किया. ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और भारत माता की जय के गगनभेदी नारों के बीच संजय तिवारी का स्वागत किया गया.

सिरमौर तहसील के डेल्ही गांव निवासी संजय तिवारी की इस उपलब्धि पर पूरे विंध्य क्षेत्र में गर्व का माहौल है. रेलवे स्टेशन पर मौजूद लोगों ने कहा कि संजय तिवारी ने न केवल रीवा और विंध्य का, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का मान बढ़ाया है. उनके सम्मान में आयोजित स्वागत कार्यक्रम में युवाओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली.

देश को सर्वोपरि बताया

इस अवसर पर संजय तिवारी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके लिए देश सर्वोपरि है. उन्होंने कहा कि अपनी जान से ज्यादा उन्हें अपने देश की चिंता थी. उन्होंने बताया कि आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उन्हें तीन गोलियां लगी थीं, लेकिन उस समय उनका पूरा ध्यान मिशन को सफल बनाने पर था. उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कोई आतंकी बचकर निकलने न पाए.

संजय तिवारी को यह प्रतिष्ठित सम्मान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान दिखाए गए अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रदान किया गया है. अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी. इसके बाद इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया.

घुटने और शरीर के अन्य हिस्सों में तीन गोलियां लगीं

तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों ने अचानक सुरक्षा बलों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और भारी गोलीबारी के बीच संजय तिवारी अग्रिम मोर्चे पर डटे रहे. मुठभेड़ के दौरान उनकी बांह, घुटने और शरीर के अन्य हिस्सों में तीन गोलियां लगीं, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपना मोर्चा नहीं छोड़ा.

अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए उन्होंने जवाबी कार्रवाई जारी रखी और एक आतंकी को मार गिराया. उनके इसी साहसिक योगदान और कर्तव्य के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया.

रीवा पहुंचने पर लोगों ने अपने वीर सपूत का गर्मजोशी से स्वागत कर उनके प्रति सम्मान और गर्व व्यक्त किया. संजय तिवारी की बहादुरी की यह कहानी आज युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है.

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