मध्य प्रदेश के राजगढ़ में अपना खोया हुआ मोबाइल वापस पाने के चक्कर में एक शख्स ने खुद ही अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट लिख दी। कड़क पुलिसिया तफ्तीश और सिम लोकेशन ने महज कुछ घंटों में नकली डकैती के इस सनसनीखेज ड्रामे की धज्जियां उड़ाकर रख दीं।
राजगढ़ में फोन चोरी होने पर पुलिस को सुनाई कहानी
राजगढ़: कानून की आंख में धूल झोंकना कितना भारी पड़ सकता है, इसका ताजा उदाहरण राजगढ़ के खिलचीपुर में देखने को मिला है। यहां के एक 42 वर्षीय शख्स का मोबाइल कहीं गिर गया था। फोन वापस पाने के लिए उसने सीधे पुलिस को ही मोहरा बनाने की सोच ली। उसने पुलिस थाने पहुंचकर रोते हुए कहानी सुनाई कि खिलचीपुर के मवेशी बाजार से लौटते वक्त नकाबपोश बदमाशों ने उसे घेरा, मारपीट की और उसका फोन व ₹25,000 कैश लूटकर भाग गए।
सर्विलांस पर लगाया मोबाइल
हाइवे पर डकैती की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर मोबाइल को सर्विलांस पर डाल दिया। लेकिन जैसे ही सिम की एक्टिविटी और लोकेशन डिटेल सामने आई, पुलिस का माथा ठनक गया।
शिकायतकर्ता का मोबाइल असल में गुम हो गया था। छह-सात दिन बाद उसने कहानी कुक-अप की और रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसका फोन और कैश लूट लिया गया है। जांच में पता चला कि फोन कथित लूट से सात दिन पहले ही बंद था। फोन जब्त कर लिया गया है और झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वाले के खिलाफ सख्त धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। कमल सिंह गहलोत, थाना प्रभारी, खिलचीपुर
इस झूठी डकैती की 5 बड़ी बातें:
7 दिन पहले का सस्पेंस: पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि जिस फोन को 1 जून को लूटा बताया जा रहा था, वो वारदात की तारीख से करीब 7 दिन पहले ही बंद हो चुका था।
सड़क पर गिरा था फोन: असल में शख्स का फोन कहीं गिर गया था, जो एक दूसरे राहगीर को मिला। उसने उसमें अपनी नई सिम डालकर चालू कर दिया था।
लोकेशन ट्रैक होते ही भंडाफोड़: पुलिस ने जब नए सिम कार्ड वाले शख्स को दबोचा, तो उसने बताया कि फोन उसे लावारिस हालत में सड़क पर पड़ा मिला था।
फरियादी ही निकला मुल्जिम: जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो शिकायतकर्ता ने कबूल किया कि उसने सिर्फ अपना फोन जल्दी वापस पाने के लिए डकैती की झूठी कहानी गढ़ी थी।
दोनों पर पुलिस का एक्शन: पुलिस ने फोन उठाने वाले पर जानकारी न देने का केस दर्ज किया है, वहीं झूठी कहानी रचने वाले असली मालिक को भी संगीन धाराओं में बुक कर लिया है।

