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‘भारत में पड़ोसी देशों से सस्ती है LPG’, विपक्ष बेवजह मचा रहा शोर, घरेलू गैस महंगी होने पर BJP नेता की दो टूक

घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 29 रुपये बढ़ाए जाने पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जिस पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी सरकार ने रविवार को रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की। पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार है, जब गैस के दाम बढ़ाए गए हैं।

घरेलू LPG के दाम 29 रुपये बढ़ने पर विपक्ष का हमला

नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने घरेलू रसोई गैस की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया है। पार्टी का कहना है कि भारत में आज भी लोगों को दुनिया के कई देशों के मुकाबले सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है। दरअसल, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद विपक्ष ने सरकार की आलोचना की है, जिस पर बीजेपी ने यह प्रतिक्रिया दी।

तीन महीनों में दूसरी बार बढ़ोतरी

यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार कीमतों में वृद्धि है, जबकि सरकारी तेल विपणन कंपनियां बढ़ी हुई वैश्विक ऊर्जा लागत के दबाव का सामना कर रही हैं। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद सरकार ने रसोई गैस को बेहद सस्ता बनाए रखा है।

विपक्ष शोर मचा रहा है

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि हर बार जब एलपीजी की कीमतों में थोड़ा बदलाव होता है, विपक्ष शोर मचाता है। वे यह नजरअंदाज करते हैं कि भारतीय घरों को अभी भी दुनिया में सबसे कम कीमतों पर रसोई गैस मिल रही है।

आपूर्ति लागत अब 1600 रुपए से अधिक

उन्होंने आगे बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थी को 14.2 किलो सिलेंडर प्रभावी रूप से 642 रुपए में मिलता है, जबकि सामान्य उपभोक्ता 942 रुपए देता है, जो बाजार से जुड़ी वास्तविक लागत से लगभग 700 रुपए कम है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आपूर्ति लागत अब 1600 रुपए से अधिक हो गई है।

भारत में LPG पड़ोसी देशों की तुलना में सस्ती

मालवीय ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत में एलपीजी पड़ोसी देशों की तुलना में सस्ती है। पाकिस्तान (1046 रुपए), नेपाल (1207 रुपए), बांग्लादेश (1225 रुपए), श्रीलंका (1241 रुपए), और विकसित देशों जैसे अमेरिका (1755 रुपए), ऑस्ट्रेलिया (1765 रुपए) और कनाडा (2411 रुपए) की तुलना में भी कम है।

फरवरी के बाद 46 प्रतिशत बढ़ी कीमतें

उन्होंने कहा कि वैश्विक एलपीजी कीमतें फरवरी के बाद लगभग 46 प्रतिशत बढ़ी हैं, जिसका कारण पश्चिम एशिया में व्यवधान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी समस्याएं हैं। भाजपा नेता ने दावा किया कि ‘अंडर-रिकवरी’ लगभग 60,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और केंद्र सरकार ने इस बोझ को उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय खुद वहन किया है।

कीमतों को किफायती बनाए रखा

उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपए सीधे बैंक खाते में मिलते हैं, जिससे 10.58 करोड़ से अधिक परिवारों को लाभ मिल रहा है। मालवीय ने यह भी कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत ने एलपीजी आपूर्ति को बाधित नहीं होने दिया, घरेलू उत्पादन बढ़ाया, आयात को विविधीकृत किया और कीमतों को किफायती बनाए रखा।

मामूली बढ़ोतरी क्यों हुई?

उन्होंने कहा कि उज्ज्वला उपभोक्ता अंतरराष्ट्रीय कीमतों से लगभग 60 प्रतिशत कम और सामान्य उपभोक्ता लगभग 45 प्रतिशत कम कीमत पर एलपीजी प्राप्त कर रहे हैं। भाजपा ने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि मामूली बढ़ोतरी क्यों हुई, बल्कि यह है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद सरकार रसोई गैस को इतना सस्ता कैसे बनाए रखने में सफल रही है।

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