विरमगाम एसडीएच की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अदिति पाठक ने सीमित संसाधनों में निभाई बड़ी जिम्मेदारी, मां और नवजात बच्ची दोनों स्वस्थ
विरमगाम। डॉक्टरों को धरती पर भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है और गुजरात के विरमगाम में घटी एक घटना ने इस कहावत को एक बार फिर सच साबित कर दिया। जबलपुर-सोमनाथ एक्सप्रेस में सफर कर रही एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में विरमगाम एसडीएच की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अदिति पाठक ने अद्भुत साहस, सूझबूझ और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए चलती ट्रेन में ही सफल प्रसव करवाया।
जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद से सुरेंद्रनगर जा रही 25 वर्षीय आरतीबेन भरतभाई देवीपूजक को यात्रा के दौरान अचानक असहनीय प्रसव पीड़ा होने लगी। परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि चलती ट्रेन में सुरक्षित प्रसव कैसे कराया जाए। महिला के पति ने यात्रियों से मदद की अपील की, जिसके बाद ट्रेन में मौजूद डॉ. अदिति पाठक आगे आईं। पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और उपकरण उपलब्ध न होने के बावजूद डॉ. अदिति पाठक ने बिना समय गंवाए स्थिति को संभाला। सहयात्रियों के सहयोग से उन्होंने ट्रेन के डिब्बे में ही सुरक्षित प्रसव करवाया और महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। नवजात की पहली किलकारी सुनते ही यात्रियों ने राहत की सांस ली और डॉ. पाठक के प्रयासों की सराहना की। डॉ. अदिति पाठक ने यहीं अपनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं की। उन्होंने मां और नवजात बच्ची को सुरक्षित रूप से विरमगाम सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां ‘ममता घर’ के स्टाफ ने दोनों की देखभाल और उपचार की जिम्मेदारी संभाली। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, समय पर मिले उपचार और चिकित्सकीय देखभाल के चलते मां और बच्ची दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। परिवार ने डॉ. अदिति पाठक और अस्पताल स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए उनकी सेवा भावना की सराहना की। इस मानवीय और प्रेरणादायक घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी डॉ. अदिति पाठक और उनकी टीम को बधाइयों का सिलसिला जारी है। लोगों का कहना है कि ऐसे समर्पित चिकित्सक ही चिकित्सा सेवा को मानवता का सबसे बड़ा धर्म बनाते हैं।

