पुलिस की सरपरस्ती में अंकलेश्वर बना अपराध का गढ़। भरूच एलसीबी की मेहरबानी और तथाकथित ‘वहीवटदारों’ (बिचौलियों) की मलाईखोरी का सनसनीखेज खुलासा।
जनता के लिए चेतावनी: अंकलेश्वर में पुलिस को मुखबिरी देने का मतलब है सीधे मौत के मुंह में जाना। कानून के रखवाले ही बन चुके हैं भक्षक।
अंकलेश्वर (विशेष ब्यूरो) : राज्य सरकार भले ही कानून व्यवस्था के चुस्त-दुरुस्त होने के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन भरूच जिले में कानून के रखवाले ही भ्रष्टाचार के दलदल में कंठ तक डूबे हुए हैं। एशिया की सबसे बड़ी औद्योगिक वसाहत (इंडस्ट्रियल एस्टेट) माना जाने वाला अंकलेश्वर आज केमिकल के उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि अवैध देसी-विदेशी शराब और मौत के काले कारोबार के लिए सुर्खियों में है। अंकलेश्वर जीआईडीसी पुलिस स्टेशन की नाक के नीचे देसी शराब का एक बहुत बड़ा नेटवर्क चलाने वाला बुटलेगर रमेश वसावा कानून की धज्जियां उड़ा रहा है। स्थानीय पुलिस अधिकारी गांधीनगर के कड़े आदेशों को ठेंगा दिखाकर, अपनी जेबें भरने की भूख में इस मौत के व्यापारी के सामने नतमस्तक नजर आ रहे हैं।
जहरीले केमिकल का ‘स्लो पॉइजन’ उजाड़ रहा मजदूर परिवारों का आशियाना
अंकलेश्वर जीआईडीसी के श्रमिक इलाकों और रेलवे स्टेशन के पीछे बनी झुग्गी-झोपड़ियों में रमेश वसावा के गुंडे सरेआम जहर बेच रहे हैं। फैक्ट्रियों से निकलने वाले बेहद खतरनाक और एसिडिक केमिकल का इस्तेमाल करके यह देसी शराब बनाई जा रही है, ऐसी चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। गरीब मजदूर और युवा इस स्लो-पॉइजन को पीकर मौत के मुंह में धकेले जा रहे हैं। जनता की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस इस मौत के तांडव में हिस्सेदार बनकर तमाशा देख रही है। सवाल यह उठता है कि क्या ये अधिकारी किसी बड़े ‘लट्ठाकांड’ (जहरीली शराब कांड) और मासूमों की लाशों के ढेर लगने का इंतजार कर रहे हैं?
दत्तु की ‘वहीवट गिरी’: खाकी की वफादारी खरीदने वाला असली किंगपिन
इस पूरे काले साम्राज्य के पीछे रमेश वसावा का दाहिना हाथ माना जाने वाला वहीवटदार (मैनेजर) दत्तु सक्रिय है। पुलिस महकमे के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, अंकलेश्वर जीआईडीसी पुलिस स्टेशन से लेकर भरूच एलसीबी (लोकल क्राइम ब्रांच) तक लाखों रुपये का हफ्ता पहुंचाने की जिम्मेदारी इसी दत्तु के कंधों पर है। जब खाकी वर्दी ही बुटलेगरों के एजेंटों के टुकड़ों पर पलने लगे, तो आम जनता न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाने के लिए आखिर किस कानून का दरवाजा खटखटाए?
भरूच एलसीबी की शर्मनाक भूमिका: मुखबिरों की सोपारी दे रही पुलिस!
भरूच जिले में सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि जुए के क्लब भी बेखौफ चल रहे हैं। सबसे भयानक बात तो यह है कि अगर कोई देशभक्त या जागरूक नागरिक भरूच एलसीबी के पीआई (पुलिस इंस्पेक्टर) को इन अड्डों के बारे में गुप्त सूचना देता है, तो वह जानकारी कुछ ही मिनटों में बुटलेगरों तक पहुंच जाती है। इसके बाद पुलिस के परोक्ष आशीर्वाद से उस नागरिक पर बेरहमी से जानलेवा हमले किए जाते हैं। सूचना देने वालों को ही खत्म कर देने का यह गठजोड़ पुलिस की नीयत पर सबसे बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
जीआईडीसी तो ठीक, अब ‘ए डिविजन’ की हद में भी पाप का साम्राज्य: भारती और ज्योति का आतंक!
अंकलेश्वर में खाकी का खौफ इस कदर खत्म हो चुका है कि अब महिला बुटलेगर भी मैदान में उतर आई हैं। अंकलेश्वर ए डिविजन पुलिस स्टेशन की हद में आने वाले सरगम शॉपिंग सेंटर के पीछे, नई नगरी में झुग्गियां बनाकर भारती और ज्योति नाम की महिला बुटलेगर पूरा जुआघर चला रही हैं। यहां खुलेआम तीन पत्ती, वरली मटका, टीरियू और चकली-पोपट नाम का जुआ खिलाया जा रहा है। अंकलेश्वर शहर जैसे शराब और जुए का ऑफिशियल हब बन गया है। पैसों के लालच में अंधे हुए पुलिस अधिकारी अंकलेश्वर के युवाओं को बर्बादी की खाई में धकेल रहे हैं। जब भी ऊपर से दबाव आता है, तो महज ‘निल रेड’ (दिखावे की छापेमारी) दिखाकर कागजों पर सब ठीक होने का नाटक कर दिया जाता है।
हर महीने 12 लाख का हफ्ता: उच्च अधिकारी के ‘कमाऊ पूत’ बने पीआई?
सूत्रों से मिली सनसनीखेज जानकारी के मुताबिक, जीआईडीसी पुलिस स्टेशन के पीआई ठाकोर और भरूच एलसीबी पीआई के लिए यह इलाका सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गया है। हर महीने 10 से 12 लाख रुपये का हफ्ता साहबों तक समय पर पहुंच जाता है। पुलिस विभाग में चर्चा है कि ये भ्रष्ट अधिकारी जिले के एक उच्च पुलिस अधिकारी के ‘कमाऊ पूत’ के रूप में संरक्षण पा रहे हैं, जिसके कारण एसपी साहब भी जिले की जमीनी हकीकत से अंजान होने का ढोंग कर रहे हैं। इस तरह की सरेआम हफ्ताखोरी परोक्ष रूप से गुजरात सरकार की छवि को धूमिल करने की एक बड़ी साजिश है।
महानगर मेट्रो के तीखे सवाल और एसपी को खुली चुनौती:
सवाल 1: भरूच जिला पुलिस कप्तान (एसपी) इन भ्रष्ट पीआई ठाकोर, ए डिविजन पुलिस और एलसीबी पीआई के खिलाफ कब सख्त निलंबन की कार्रवाई करेंगे? या फिर इस हफ्ताखोरी की आंच ऊपर तक पहुंच रही है?
सवाल 2: गृहमंत्री हर्ष संघवी और मुख्यमंत्री के आदेशों को पैरों तले कुचलने वाले बुटलेगर रमेश, वहीवटदार दत्तु और नई नगरी की भारती-ज्योति को कब जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा?
सवाल 3: क्या भरूच एसपी साहब गांधीनगर की विजिलेंस टीमों के आने और छापेमारी करने का इंतजार कर रहे हैं, या फिर अपनी सत्ता का उपयोग कर तुरंत इन सभी अड्डों पर स्पेशल ऑपरेशन चलाकर खाकी की लाज बचाएंगे?
अंकलेश्वर की जनता अब कागजी जांच के झांसे में आने वाली नहीं है। अगर भरूच एसपी द्वारा तुरंत निष्पक्ष अधिकारियों को भेजकर इन अड्डों पर छापेमारी नहीं की गई और सख्त एक्शन नहीं लिया गया, तो जनता खुद सड़कों पर उतरकर कानून अपने हाथ में लेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भरूच पुलिस प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि एसपी साहब में खाकी का पावर बचा है या फिर बुटलेगरों का पैसा जीत जाता है?

