दिग्गज नेता के भाई के आशीर्वाद से सुरेश चौधरी का ‘हफ्ता राज’ | SP बंगले से ऑपरेट हो रहा है करोड़ों का काला कारोबार | IG के नाम पर वसूली करने वाले दो पूर्व LCB जवान बेखौफ
गांधीनगर/बनासकांठा : गांधी के गुजरात में शराबबंदी के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला एक ऐसा खौफनाक सच सामने आया है, जो सूबे की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करता है। राजस्थान से गुजरात की सीमा में प्रवेश करने वाले शराब और ड्रग्स से लदे कंटेनर किसी चोरी-छिपे नहीं, बल्कि उत्तर गुजरात के एक दिग्गज राजनीतिक नेता के सगे भाई के इशारे पर और उसके बेहद करीबी ‘खास’ आदमी सुरेश चौधरी की देखरेख में धड़ल्ले से एंट्री कर रहे हैं। चौधरी समाज के इस बड़े नेता का वरदहस्त होने के कारण, जिले का कोई भी अधिकारी सुरेश चौधरी के खिलाफ उंगली उठाने की हिम्मत तक नहीं कर पा रहा है।
सुरेश चौधरी का हफ्ता राज और SP बंगले का ‘आश्रय’
विश्वसनीय सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, बनासकांठा के पुलिस अधीक्षक (SP) प्रशांत सुंबे का कथित मुख्य ‘वहीवटदार’ (बिचौलिया/वसूलीबाज) माना जाने वाला सुरेश चौधरी पूरे जिले में बुटलेगरों (शराब तस्करों) से लाखों-करोड़ों रुपये की अवैध वसूली का नेटवर्क चला रहा है। नेता के भाई की छत्रछाया के चलते सुरेश चौधरी इतना ताकतवर हो चुका है कि चर्चा यहां तक है कि उसे बिना किसी अड़चन के हफ्ता वसूलने के लिए खुद SP बंगले में ही पनाह दी गई है! आशंका जताई जा रही है कि इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा गृह मंत्रालय के उच्च स्तर तक भी पहुंच रहा है।
दूसरी तरफ, रेंज आईजी (Range IG) साहब के नाम पर अवैध वसूली करने के लिए पूर्व LCB कर्मचारी राजेश परमार और रेंज आईजी सेल के पीएसआई (PSI) एस. जे. परमार को मैदान में उतारा गया है। ये दोनों जवान पहले बनासकांठा एलसीबी (LCB) में लंबे समय तक तैनात रह चुके हैं, जिसके कारण उन्हें हर एक बुटलेगर की कुंडली पता है। यह जोड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी सुरेश चौधरी और उसकी सिंडिकेट तक पहुंचाती है।
5 संवेदनशील बॉर्डर बने ‘सुरेश चौधरी का ग्रीन कॉरिडोर’
राजनीतिक रसूख और खाकी की मिलीभगत से जिले की इन पांच सबसे संवेदनशील सीमाओं को बुटलेगरों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है:
गुंदरी बॉर्डर और नेनावा बॉर्डर
अमीरगढ़ चेकपोस्ट
अंबाजी छापारी बॉर्डर और जांबूडी चेकपोस्
बेखौफी की हद: सुरेश चौधरी खुद तय करता है कि कौन सा कंटेनर कब और किस समय बॉर्डर पार करेगा। इतना ही नहीं, इन कंटेनरों की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए ‘स्पेशल प्रोटेक्शन’ के तौर पर गाड़ी के अंदर एक पुलिसकर्मी को बिठाया जाता है, जो जिला या थाना क्षेत्र बदलते ही बदल जाता है!
‘महानगर मेट्रो’ के तीखे सवाल: बड़े मगरमच्छों को क्यों बचा रहा है सुरेश?
1 सुरेश चौधरी छोटे-मोटे बुटलेगरों को पकड़वाकर बड़े पैमाने पर तस्करी करने वाले मगरमच्छों को संरक्षण क्यों दे रहा है?
2 चौधरी समाज के वो दिग्गज नेता कौन हैं, जिनके खौफ और रसूख के आगे उच्च पुलिस अधिकारी भी नतमस्तक हैं?
3 क्या SP प्रशांत सुंबे और रेंज आईजी वाकई इस पूरे खेल से अनजान हैं या यह सब जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है?
अधिकारियों का लचर रवैया: साधी चुप्पी
जब इस महा-खुलासे को लेकर बनासकांठा SP साहब से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाने की जहमत नहीं उठाई। वहीं, LCB PI ने “कार्रवाई चल रही है” कहकर पल्ला झाड़ लिया, जबकि रेंज आईजी ने इस पूरे मामले से अनभिज्ञता जताई है।
पूरे जिले में वहीवटदार सुरेश चौधरी और उसके आका (नेता के भाई) का इतना खौफ है कि कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले की जांच सीधे गांधीनगर (मुख्यालय) से नहीं कराई गई, तो सरहदी जिला बनासकांठा गुजरात के युवाओं को बर्बाद करने वाला ड्रग्स और शराब का मुख्य केंद्र बन जाएगा।

