गांधीनगर के आदेश भरूच की सीमा पर ही फेल! कानून के रखवाले ही बने जहरीले केमिकल युक्त स्लो-पॉइजन के भागीदार!
खाकी वर्दी पर लगा सबसे बड़ा कलंक: LCB की मेहरबानी से बुटलेगर बेखौफ, जागरूक नागरिकों पर हमले करवाकर मुखबिरों की सुपारी दे रहे अधिकारी!
अंकलेश्वर, विशेष प्रतिनिधि : गुजरात सरकार भले ही शराबबंदी के कितने भी बड़े दावे करे, लेकिन भरूच जिले में यह कानून महज कागजों तक ही सीमित रह गया है। उद्योगों की राजधानी माना जाने वाला अंकलेश्वर आज अपराधियों और बुटलेगरों (शराब माफियाओं) के लिए स्वर्ग बन चुका है। अंकलेश्वर GIDC पुलिस स्टेशन से महज कुछ ही दूरी पर देसी शराब का अड्डा चलाने वाला बुटलेगर रमेश वसावा पुलिस के आशीर्वाद से खुलेआम चुनौती दे रहा है। कानून-व्यवस्था की बातें करने वाले स्थानीय अधिकारी अपनी जेबें भरने के लालच में गांधीनगर के आदेशों को घोलकर पी गए हैं।
गरीबों की जिंदगी के साथ खिलवाड़: मौत का यह तांडव कब थमेगा?
अंकलेश्वर रेलवे स्टेशन के पीछे और GIDC क्षेत्र के मजदूर बस्तियों को इन मौत के सौदागरों ने नर्क बना दिया है। रमेश वसावा के आदमी सरेआम जहर बेचकर देश के भविष्य समान युवाओं और गरीब मजदूरों के परिवारों को बर्बाद कर रहे हैं। जनता की सुरक्षा के लिए बनी पुलिस मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रही है। जनता के टैक्स के पैसों से मोटा वेतन पाने वाले ये अधिकारी आखिर किसकी शरण में जाकर बैठे हैं, यह एक बड़ा सवाल है।
वफादार (बिचौलिया) दत्तू का मायाजाल: पूरे नेटवर्क का असली किंगपिन!
इस पूरे काले कारोबार को सुनियोजित तरीके से चलाने की जिम्मेदारी रमेश के बिचौलिये दत्तू के पास है। पुलिस विभाग में चल रही चर्चाओं के अनुसार, अंकलेश्वर पुलिस स्टेशन से लेकर भरूच LCB तक लाखों रुपये की मलाई समय पर पहुंचाने का काम यही दत्तू करता है। जब रक्षक ही बुटलेगर के एजेंटों के टुकड़ों पर पलने लगें, तो आम जनता अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करे?
भरूच LCB की संदिग्ध भूमिका: रक्षक या बुटलेगरों के भागीदार?
जिले में न केवल देसी शराब, बल्कि अंग्रेजी शराब, जुआ और नशीले पदार्थों का व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यदि कोई संभ्रांत नागरिक LCB के पीआई (पुलिस इंस्पेक्टर) को इस संबंध में कोई गुप्त सूचना देता है, तो वह जानकारी तुरंत बुटलेगरों तक पहुंच जाती है। इसके बाद, पुलिस के संरक्षण में उस नागरिक को निशाना बनाकर बेरहमी से पीटा जाता है। मुखबिरों को ही खत्म कर देने की यह नीति पुलिस की नीयत पर बड़े सवाल खड़े करती है।
बड़े लट्ठाकांड (जहरीली शराब त्रासदी) का काउंटडाउन: क्या मासूमों की लाशों के बाद ही जागेगा प्रशासन?
आशंका है कि अंकलेश्वर की केमिकल फैक्ट्रियों से निकलने वाले खतरनाक और जहरीले रसायनों का इस्तेमाल करके यह देसी शराब बनाई जा रही है। यह जहरीला केमिकल कभी भी बड़े लट्ठाकांड का कारण बन सकता है। क्या स्थानीय पुलिस किसी बड़ी दुर्घटना और लाशों के ढेर देखने का इंतजार कर रही है? यदि भविष्य में कोई बड़ी त्रासदी होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
GIDC पीआई ठाकुर और LCB पीआई के ‘लेनदेन’ की खुली चर्चा
GIDC पुलिस स्टेशन के पीआई ठाकुर को इलाके में चल रही अवैध गतिविधियों को रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं है, उनका पूरा ध्यान सिर्फ ‘लेनदेन’ और सेटिंग बिठाने में है। दूसरी तरफ, भरूच LCB पीआई के लिए तो यह इलाका कमाई का जरिया बन चुका है। सूत्रों के मुताबिक, हर महीने 10 से 12 लाख रुपये का हफ्ता इन साहब तक नियमित रूप से पहुंचता है। पुलिस महकमे में तो यहां तक चर्चा है कि यह अधिकारी जिले के एक उच्च पुलिस अधिकारी के ‘कमाऊ पूत’ के रूप में बेखौफ होकर इस हफ्ता वसूली का साम्राज्य चला रहे हैं।

