GST के फर्जी बिल मामले को रफा-दफा करने के लिए मांगी थी 25 लाख की रिश्वत, ACB के जाल में फंसे भ्रष्ट अधिकारी; सरकारी गलियारों में मचा हड़कंप।
राजकोट | विशेष संवाददाता : गुजरात के सरकारी दफ्तरों में बैठे कुछ अधिकारियों की भूख इस कदर बढ़ गई है कि उन्हें अब सरकार से मिलने वाला मोटा वेतन और सुख-सुविधाएं भी कम पड़ने लगी हैं। जनता की सेवा के नाम पर कुर्सी संभालने वाले ये ‘सफेदपोश’ अधिकारी अब खुलेआम लाचारी का सौदा करने लगे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने राजकोट में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए CGST सुपरिंटेंडेंट और एक टैक्स कंसल्टेंट को रंगे हाथों गिरफ्तार कर इस सिस्टम की पोल खोल दी है।
फाइल दबाने का खेल: 25 लाख की डिमांड
पूरा मामला जीएसटी (GST) की जांच से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के खिलाफ जीएसटी न भरने और फर्जी बिल बनाने से जुड़ी एक अर्जी की जांच CGST सुपरिंटेंडेंट मुकेश कुमार मनोबोध कुमार कर रहे थे। कानूनन कार्रवाई करने के बजाय, मुकेश कुमार ने इस मामले को खत्म करने के बदले में 25 लाख रुपये की भारी-भरकम घूस मांगी।
बस स्टैंड पर हुई ‘सेटलमेंट’ और गिरफ्तारी
भ्रष्टाचार के इस सौदे में काफी मोलभाव हुआ और अंत में मामला 20 लाख रुपये पर तय हुआ। रिश्वतखोर अधिकारी मुकेश कुमार इतना शातिर था कि उसने खुद पैसे न लेकर अपने विश्वासपात्र टैक्स कंसल्टेंट को पैसे लेने भेजा। राजकोट बस स्टैंड पर जैसे ही टैक्स कंसल्टेंट ने घूस की रकम हाथ में ली, पहले से ही जाल बिछाकर बैठी ACB की टीम ने उसे दबोच लिया। इसके तुरंत बाद मुख्य आरोपी सुपरिंटेंडेंट मुकेश कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
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यह कोई पहली घटना नहीं है जब गुजरात में क्लास-1 स्तर का अधिकारी रिश्वत लेते पकड़ा गया हो। सवाल यह उठता है कि आखिर अधिकारियों में कानून का डर खत्म क्यों हो गया है?
सफेदपोश दलाली: अब अधिकारियों ने सीधे पैसे लेने के बजाय टैक्स कंसल्टेंट और एजेंटों का एक ‘सुरक्षा घेरा’ बना लिया है। ये दलाल अधिकारियों के लिए ‘कलेक्शन एजेंट’ का काम करते हैं।
फैलता खौफ: राजकोट की इस कार्रवाई के बाद से अन्य सरकारी विभागों के भ्रष्ट बाबुओं में भारी फफड़ाहट (डर) देखी जा रही है।
जनता का घाव: एक तरफ आम नागरिक महंगाई और टैक्स की मार झेल रहा है, दूसरी तरफ रक्षक ही भक्षक बनकर जनता का खून चूस रहे हैं।

