Homeआर्टिकलजज्बा-ए-जिंदगी : ऐ जिंदगी! तू इम्तिहान ले, मैं हौसलों का हिसाब लिखूँगा…

जज्बा-ए-जिंदगी : ऐ जिंदगी! तू इम्तिहान ले, मैं हौसलों का हिसाब लिखूँगा…

अहमदाबाद। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर शख्स किसी न किसी मोर्चे पर लड़ रहा है। कभी आर्थिक तंगी, कभी रिश्तों की उलझन, तो कभी करियर की दौड़। लेकिन इस जद्दोजहद के बीच कुछ लोग ऐसे होते हैं जो मुश्किलों को देखकर रास्ता नहीं बदलते, बल्कि अपनी हिम्मत से मुश्किलों का रुख बदल देते हैं। किसी ने सच ही कहा है:

“जिंदगी!! हर रोज ही,,, तेरा इम्तिहान देने को… हर लम्हा तैयार रहती हूं..!!”

इम्तिहान नहीं, यह तो निखरने का अवसर है

अक्सर हम परेशानियों को एक ‘बौझ’ मान लेते हैं, लेकिन असल में जिंदगी का हर नया इम्तिहान हमें टूटने के लिए नहीं, बल्कि खुद को और निखारने के लिए आता है। सोचिए, अगर समुद्र में लहरें न हों, तो नाविक कभी कुशल नहीं बन पाएगा। ठीक उसी तरह, अगर जीवन में चुनौतियां न हों, तो इंसान को अपनी असली ताकत का अंदाजा कभी नहीं होगा।

हर लम्हे में छिपी है एक नई शुरुआत

सुबह की पहली किरण से लेकर रात के सन्नाटे तक, वक्त हमसे कई सवाल पूछता है। कभी वह हमें थकाता है, तो कभी रुलाता है। पर जो व्यक्ति हर लम्हा खुद को तैयार रखता है, वही इतिहास रचता है। तैयारी का मतलब सिर्फ जीतना नहीं, बल्कि हारने के बाद फिर से खड़े होने का साहस जुटाना है।

मुश्किलों को कहें— ‘मैं तैयार हूँ’

जब आप जिंदगी की आंखों में आंखें डालकर कहते हैं कि “मैं तैयार हूँ”, तब आधी जंग आप वहीं जीत जाते हैं। यह शब्द केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक ‘कमांड’ है आपके मस्तिष्क के लिए, जो आपको किसी भी विपरीत परिस्थिति में टूटने नहीं देता।

महानगर मेट्रो की कलम से:

आज अपने आईने के सामने खड़े होकर खुद से यह वादा कीजिए। चाहे हालात कैसे भी हों, चेहरे की मुस्कान और दिल का हौसला कम नहीं होने देंगे। याद रखिए, सिक्के के दो पहलू होते हैं— एक वक्त आपका है, और दूसरा भी आपका ही होगा, बस आपको हर इम्तिहान के लिए “तैयार” रहना है।

लेखक: पवन माकन ‘महानगर मेट्रो’

जिंदगी के हर रंग, आपके संग।

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