विसावદર (जूनागढ़) | विशेष संवाददाता : गुजरात के विसावदर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली डुंगरपुर जिला पंचायत सीट पर चुनावी सरगर्मियों के बीच एक ऐसी घटना घटी है, जिसने स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ से चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार को पुलिस द्वारा जिस तरह से हिरासत में लिया गया, उसे विपक्ष ने ‘पुलिस की वर्दी में अपहरण’ करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, विसावदर की डुंगरपुर सीट से ताल ठोक रहे उम्मीदवार को पुलिस की एक टीम अचानक उनके समर्थकों के बीच से ले गई। आरोप है कि पुलिस ने इस दौरान न तो कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाई और न ही हिरासत में लेने का कोई पुख्ता कारण बताया। चश्मदीदों के मुताबिक, पुलिस का रवैया ऐसा था मानो वे किसी चुनाव लड़ने वाले नागरिक को नहीं, बल्कि किसी बड़े अपराधी को पकड़ने आए हों।
विपक्ष का प्रहार: “भाजपा की हार का डर”
इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा है कि:
सत्ता का दुरुपयोग: भाजपा अपनी हार के डर से बौखला गई है और अब चुनाव जीतने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है।
लोकतंत्र की हत्या: पुलिस का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों को डराना-धमकाना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है।
खाकी पर दबाव: आरोप लगाया गया है कि पुलिस अधिकारियों पर सत्ता के ‘आकाओं’ का इतना दबाव है कि वे नियम-कानून ताक पर रखकर कार्रवाई कर रहे हैं।
जनता में भारी रोष, पुलिस की चुप्पी
उम्मीदवार को जिस तरह से ले जाया गया, उसके बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह जनता के मत का अपमान है।
वहीं, दूसरी ओर पुलिस विभाग की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण नहीं आया है। प्रशासनिक मौन इस विवाद को और हवा दे रहा है।

