नई दिल्ली | महानगर मेट्रो ब्यूरो आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे घमासान ने अब एक कानूनी और संसदीय लड़ाई का रूप ले लिया है। राघव चड्ढा और अन्य राज्यसभा सांसदों द्वारा पार्टी के खिलाफ अपनाए गए बागी रुख को ‘आप’ नेतृत्व ने बेहद गंभीरता से लिया है। पार्टी के कद्दावर नेता और सांसद संजय सिंह ने साफ कर दिया है कि पार्टी इस विश्वासघात को आसानी से नहीं पचने देगी और बागी सांसदों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
अवैध और असंवैधानिक है यह कदम : संजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
“आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों द्वारा उठाया गया यह कदम पूरी तरह से अवैध, गलत और असंवैधानिक है। यह न केवल पार्टी के अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि संसदीय नियमों के भी खिलाफ है।”
संजय सिंह ने एलान किया है कि वे इस मामले को लेकर राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति को औपचारिक पत्र लिखेंगे। इस पत्र में संसदीय नियमों का हवाला देते हुए मांग की जाएगी कि इन सभी बागी सांसदों की सदस्यता तुरंत प्रभाव से समाप्त की जाए। पार्टी का तर्क है कि जनता के वोट और पार्टी के सिंबल पर चुनकर आने के बाद इस तरह की बगावत ‘दलबदल विरोधी कानून’ के दायरे में आती है।
हार मानने को तैयार नहीं ‘आप’
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आम आदमी पार्टी इस समय अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। पार्टी के पास मौजूद सभी विकल्पों का इस्तेमाल किया जा रहा है:
1 कानूनी मोर्चा: संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत कार्रवाई।
2 संसदीय मोर्चा: सभापति के समक्ष पक्ष रखकर सदस्यता रद्द कराने की कोशिश।
3 जनता की अदालत: बागियों को ‘गद्दार’ घोषित कर राजनीतिक रूप से अलग-थलग करना।
सियासी भविष्य अधर में
इस घटनाक्रम से दिल्ली और पंजाब की राजनीति में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। यदि इन 7 सांसदों की सदस्यता चली जाती है, तो राज्यसभा के समीकरण बदल जाएंगे। फिलहाल, आम आदमी पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह झुकने के बजाय कानूनी रास्ते से बागियों को सबक सिखाने के मूड में है।

