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‘नोट’ पर भारी पड़ा ‘वोट’ का गौरव! मतदाताओं ने मुंह पर फेंके पैसे, मंदिर और कैश के नाम पर वोट मांग रहे नेताजी को खदेड़ा

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: चुनाव जीतने के लिए पैसे बांटने की बात कबूली; जागरूक जनता ने दिखाया आईना।

मुख्य समाचार : अहमदाबाद : कहते हैं लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है, और इस बार गुजरात के स्थानीय चुनाव में मतदाताओं ने इसे सच कर दिखाया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो बिजली की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें एक नेताजी को चुनाव जीतने के लिए ‘नोटों का दांव’ खेलते हुए देखा जा सकता है। लेकिन इस बार दांव उल्टा पड़ गया। जागरूक मतदाताओं ने न केवल उनके द्वारा दी गई नकदी को उनके मुंह पर वापस दे मारा, बल्कि उन्हें इलाके से दुम दबाकर भागने पर मजबूर कर दिया।

वीडियो में ‘पाप’ का कबूलनामा

वायरल वीडियो में संबंधित नेताजी को यह स्वीकार करते हुए सुना जा सकता है कि उन्होंने पिछले चुनावों में भी वोट हासिल करने के लिए भारी रकम बांटी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने मतदाताओं को लुभाने के लिए मंदिर बनवाने के नाम पर भी पैसे देने का ‘सौदा’ करने की कोशिश की। नेताजी को लगा कि इस बार भी नोटों की चमक के आगे जनता अपना ईमान बेच देगी, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।
जब जनता ने सिखाया सबक

जैसे ही नेताजी ने अपने क्षेत्र में नकदी बांटने की कोशिश की, स्थानीय लोग भड़क गए। आक्रोशित मतदाताओं ने साफ शब्दों में कहा कि “हमारा वोट बिकाऊ नहीं है।”

रोकड़ वापसी: लोगों ने दी गई नकदी हाथ में लेने के बजाय नेता के मुंह पर ही लौटा दी।
क्षेत्र से खदेड़ा: ‘चोर-चोर’ और ‘भ्रष्टाचारी वापस जाओ’ के नारों के बीच नेताजी को वहां से भागना पड़ा।

भ्रष्ट राजनीति पर करारा प्रहार

यह घटना उन राजनेताओं के लिए एक चेतावनी है जो चुनाव को सेवा नहीं बल्कि ‘सौदा’ समझते हैं। मंदिर और धर्म की आड़ लेकर वोटों की फसल काटने का युग अब ढलान पर नजर आ रहा है। यह वीडियो साबित करता है कि जनता अब जुमलों और खैरात के बजाय विकास और ईमानदारी को प्राथमिकता दे रही है।

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