मोरबी : गुजरात की मोरबी राजनीति में इन दिनों ‘मोरे मोरो’ का नारा गूंज रहा है। पूर्व विधायक कांतिलाल अमृतिया और सामाजिक कार्यकर्ता पंकज रणसरिया के बीच छिड़ी यह जुबानी जंग अब एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। मामला विकास कार्यों के लिए आवंटित होने वाले 20 करोड़ रुपये और उसके ‘कमीशन’ के आरोपों से जुड़ा है।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में कांतिलाल अमृतिया ने मोरबी के राजनगर क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 20 करोड़ रुपये पास कराने की बात कही थी। चर्चा यह थी कि इस राशि का 20% हिस्सा (लगभग 4 करोड़ रुपये) पंकज भाई को देने की पेशकश की गई थी। अब इस पर पंकज रणसरिया ने पलटवार करते हुए इसे स्वीकार कर लिया है।
जनता के हित के लिए ‘डील’ मंजूर
पंकज भाई ने सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए कहा : “जनता के हित के लिए मैं 20 करोड़ के 20% देने को तैयार हूं। अगर यह पैसा क्षेत्र के विकास और लोगों की भलाई में काम आता है, तो मुझे यह शर्त मंजूर है।”
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। पंकज रणसरिया का यह दांव कांतिलाल अमृतिया के लिए एक सीधी चुनौती माना जा रहा है।
10 दिन का अल्टीमेटम: क्या मंजूर होंगे 20 करोड़?
अब सबसे बड़ा सवाल जनता के बीच यह है कि क्या कांतिलाल अमृतिया अगले 10 दिनों के भीतर राजनगर के लिए यह 20 करोड़ रुपये की राशि मंजूर करवा पाएंगे? पंकज भाई के इस ‘मोरे मोरो’ (आमने-सामने) वाले रुख ने प्रशासन और सत्ता पक्ष को धर्मसंकट में डाल दिया है।

