पहलगाम | विशेष संवाददाता : कश्मीर की वादियों का गहना कहा जाने वाला पहलगाम आज भी एक साल पुराने जख्मों से उबर नहीं पाया है। पिछले वर्ष हुए भीषण आतंकी हमले, जिसमें 26 मासूम लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, उसकी गूंज आज भी यहाँ की हवाओं में महसूस की जा सकती है। प्रकृति की गोद में बसे इस शहर में अब सैलानियों की चहल-पहल की जगह सुरक्षाबलों के बूटों की आवाज सुनाई देती है।
पर्यटन पर मार: 75% की भारी गिरावट
आतंकी हमले का सबसे बुरा असर यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी पर्यटन पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों और स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, पिछले एक साल में प्रवावियों (टूरिस्ट्स) की संख्या में 75% तक की कमी दर्ज की गई है। जो होटल और लॉज कभी महीनों पहले बुक हो जाते थे, वे आज खाली पड़े हैं।
रोजी-रोटी का संकट: बेबस हुए स्थानीय निवासी
पर्यटकों की कमी ने स्थानीय गाइडों, टैक्सी चालकों और घोड़ा मालिकों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा कर दी है।
गाइड : “साहब, पहले दिन भर फुर्सत नहीं मिलती थी, अब हफ़्तों इंतज़ार करना पड़ता है।”
व्यवसाय : हस्तशिल्प और ड्राई फ्रूट्स के व्यापारियों का काम ठप होने की कगार पर है।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम: 6 पर्यटन स्थल बंद
प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से कड़ा रुख अपनाया है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पहलगाम के 6 प्रमुख दर्शनीय स्थलों को फिलहाल बंद कर दिया
गया है। चप्पे-चप्पे पर तलाशी अभियान और निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
शहादत को सलाम: बहादुर आदिल के परिवार को मिला नया घर
इस काले अध्याय के बीच वीरता की एक कहानी उम्मीद की किरण जगाती है। आतंकियों का डटकर मुकाबला करने वाले जांबाज आदिल की शहादत को सरकार ने नमन किया है। आदिल के परिवार को प्रशासन की ओर से पुनर्वास के लिए एक नया घर आवंटित किया गया है। स्थानीय निवासी आदिल को एक नायक के रूप में देखते हैं, जिसने अपनी जान देकर कई लोगों को बचाया था।

