Homeपश्चिम बंगाल चुनाव 2026₹1500 की 'रेवड़ी' या बेरोजगारी का 'मरहम'? बंगाल की बेटियों ने ममता...

₹1500 की ‘रेवड़ी’ या बेरोजगारी का ‘मरहम’? बंगाल की बेटियों ने ममता सरकार से पूछा- नौकरी कब मिलेगी?

ब्यूरो रिपोर्ट: महानगर मेट्रो : लोकेशन : कोलकाता/दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल: चुनावी बिसात बिछ चुकी है और दांव पर है बंगाल की सत्ता। ममता सरकार ने 1 अप्रैल से ‘बांगलार युवा साथी योजना’ लागू कर मास्टरस्ट्रोक खेलने की कोशिश की है। दावा है कि 3.15 करोड़ महिलाओं को ₹1500 की आर्थिक मदद दी जाएगी। पहला किस्त जारी भी हो चुका है, लेकिन जमीन पर इस योजना को लेकर ‘दुआ’ से ज्यादा ‘दहाड़’ सुनाई दे रही है।

खाली खाता और फूटता गुस्सा

दुर्गापुर की रहने वाली मोमिता इस योजना की विसंगतियों का चेहरा बन गई हैं। फॉर्म भरने के बावजूद उनके खाते में फूटी कौड़ी नहीं आई। गुस्से से तमतमाई मोमिता साफ़ लफ्जों में कहती हैं:

“हमें चंद रुपयों की खैरात नहीं, अपने भविष्य की गारंटी चाहिए। ₹1500 से महीने का खर्च नहीं चलता। आज की लड़कियों को पैसे से ज्यादा नौकरी की जरूरत है। सरकार हमें आत्मनिर्भर बनाने के बजाय आश्रित बना रही है।”

ग्राउंड रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

बड़ा टारगेट: राज्य की लगभग 3.15 करोड़ आबादी को इस योजना के दायरे में लाने की तैयारी।
कैश बनाम करियर: शिक्षित युवतियों का तर्क है कि सरकारी खजाने का पैसा उद्योगों और भर्ती परीक्षाओं में लगाया जाना चाहिए था।
ममता का दांव: राजनीतिक गलियारों में इसे ‘वोट बैंक’ को साधने की कोशिश माना जा रहा है।
चूकती उम्मीदें: हजारों ऐसी युवतियां हैं जिनके आवेदन तकनीकी कारणों से लटके हैं, जिससे प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है।

‘ऋण चुकाने’ की चेतावनी

जहाँ एक तरफ सरकार इसे ‘उपहार’ बता रही है, वहीं बंगाल की जागरूक महिलाएं इसे अलग नजरिए से देख रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक एक ही चर्चा है— “अगर सरकार हमें सिर्फ पैसे देकर चुप कराना चाहती है, तो हम भी मतदान के जरिए इस ‘अन्याय’ का ऋण जरूर चुकाएंगे।”

महानगर मेट्रो का नजरिया

बंगाल में बेरोजगारी एक गहरे घाव की तरह है। ₹1500 की मदद कुछ समय के लिए राहत दे सकती है, लेकिन क्या यह स्थायी समाधान है? मोमिता जैसी हजारों बेटियों का सवाल सीधा है: सम्मान की नौकरी बड़ी है या सरकारी मदद की मोहताजी? अब देखना यह है कि ‘दीदी’ का यह दांव उन्हें सत्ता की कुर्सी तक ले जाता है या युवाओं का यह आक्रोश बाजी पलट देता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments