विशेष रिपोर्ट, महानगर मेट्रो
अहमदाबाद/नोएडा: कहते हैं कि “मन में अगर कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।” इस कहावत को अक्षरशः सच कर दिखाया है दीपा भाटी ने। जहां अधिकांश लोग 40 की उम्र तक आते-आते करियर में ठहराव ढूंढने लगते हैं, वहीं दीपा भाटी ने खाकी वर्दी पहनकर समाज और खासकर महिलाओं के लिए एक नई मिसाल पेश की है। 18 साल की शादीशुदा जिंदगी और तीन बच्चों की परवरिश के बीच, उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) की परीक्षा पास कर PCS अधिकारी बनकर इतिहास रच दिया है।
संघर्ष और दृढ़ संकल्प की गाथा
दीपा भाटी का यह सफर फूलों की सेज नहीं था। घर का कामकाज, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच किताबों से नाता जोड़ना लोहे के चने चबाने जैसा था।
शादी के 18 साल: लंबे समय तक पढ़ाई से दूर रहने के बाद फिर से शुरुआत करना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
3 बच्चों की मां: बच्चों की जरूरतों और उनके भविष्य की चिंता के बीच अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया।
40 की उम्र में सफलता: उम्र के इस पड़ाव पर जहां लोग नया सीखने से कतराते हैं, उन्होंने अधिकारी बनकर साबित किया कि सीखने और जीतने की कोई सीमा नहीं होती।
महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
दीपा भाटी की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन लाखों गृहणियों के लिए उम्मीद की एक किरण है जो शादी के बाद अपने सपनों को दबा देती हैं। उनका यह सफर संदेश देता है कि यदि आपके पास दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार का साथ हो, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती।
“सपने पूरे करने के लिए कभी देर नहीं होती। जरूरत है तो बस एक सही फैसले और कठिन परिश्रम की।” – दीपा भाटी
परिवार बना ताकत
दीपा बताती हैं कि उनकी इस सफलता में उनके पति और बच्चों का योगदान अतुलनीय है। जब भी वे हार मानने का विचार करतीं, उनका परिवार उन्हें प्रोत्साहित करता। आज जब वे अधिकारी के रूप में कार्यभार संभालेंगी, तो न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा देश उनकी इस हिम्मत को सलाम कर रहा है।

