तिरुवनंतपुरम / अहमदाबाद रिपोर्ट: पवन माकन (ग्रुप एडिटर, महानगर मेट्रो)
पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बादलों और वैश्विक तनाव के बीच, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केरल के तिरुवनंतपुरम में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए हुंकार भरी है। उन्होंने पाकिस्तान सहित तमाम पड़ोसी मुल्कों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में रत्ती भर भी समझौता नहीं करेगा।
समुद्र में भारत का अभेद्य कवच: ‘ऑपरेशन सिंदूर’
समुद्री सुरक्षा पर कड़ा रुख अपनाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भले ही दुनिया के एक कोने में भीषण संघर्ष चल रहा हो, लेकिन भारतीय नौसेना पूरी तरह मुस्तैद है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख करते हुए दुश्मन देशों को चेताया:
“भूल से भी भूल न करना, ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए हमारी नौसेना लगातार तैनात है और किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब देने में सक्षम है।”
ईंधन संकट की अफवाहों पर लगाया पूर्णविराम
युद्ध के चलते देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने या किल्लत होने की अफवाहों पर प्रहार करते हुए राजनाथ सिंह ने देशवासियों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ‘ऊर्जा सुरक्षा’ को लेकर अत्यंत गंभीर है। देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है, इसलिए जनता को किसी भी तरह की अफवाहों से घबराने की आवश्यकता नहीं है।
रक्षा निर्यात में भारत की ‘ऐतिहासिक छलांग’
रक्षा मंत्री ने गर्व के साथ बताया कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को हथियार बेचने वाला देश बन चुका है। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु:
- रिकॉर्ड वृद्धि: भारत के रक्षा निर्यात में 62% का ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया है।
- आत्मनिर्भर भारत: यह प्रगति प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की बड़ी सफलता का प्रमाण है।
- वैश्विक भरोसा: आज दुनिया के कई शक्तिशाली देश भारतीय सैन्य शक्ति और स्वदेशी तकनीक पर भरोसा जता रहे हैं।
एडिटर टेक (Editorial Note):
पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत की यह कूटनीतिक और सैन्य सक्रियता साबित करती है कि देश आज आर्थिक और सामरिक, दोनों मोर्चों पर महाशक्ति बनकर उभर रहा है। राजनाथ सिंह का यह बयान सीधे तौर पर उन ताकतों को संदेश है जो भारत की शांतिप्रियता को उसकी कमजोरी समझने की भूल करते हैं। भारत अपनी सीमाओं की रक्षा जमीन से लेकर गहरे समंदर तक करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

