पवन माकन : अहमदाबाद : शहर का पॉश इलाका बोडकदेव, जहाँ बड़े-बड़े रईस और संभ्रांत परिवार रहते हैं, आज एक शर्मनाक और अवैध कारोबार का केंद्र बन चुका है। पुलिस स्टेशन से महज चंद कदम की दूरी पर स्थित “एक्यम स्पा” अब मसाज का नहीं, बल्कि ‘अनैतिकता’ का ‘सुपरमार्केट’ बन चुका है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस स्पा को किसका ‘अभयदान’ प्राप्त है? चर्चा है कि इस पूरे खेल का सूत्रधार पुलिस का ‘वहीवतदार’ (कलेक्शन एजेंट) जयपाल है।
‘जयपाल’ का नाम, और खामोश है कानून का दाम!
स्थानीय सूत्रों और गलियारों में दबी जुबान से एक ही नाम गूंज रहा है—जयपाल। आरोप है कि बोडकदेव पुलिस स्टेशन का यह वहीवतदार इस अवैध साम्राज्य का ‘कवच’ बना हुआ है।
क्या यह महज इत्तेफाक है कि शिकायतें मिलने के बाद भी पुलिस की गाड़ियां इस स्पा के आगे से बिना रुके निकल जाती हैं? स्थानीय निवासियों का स्पष्ट आरोप है कि ‘एक्यम स्पा’ से हर महीने लाखों की ‘मंथली’ सीधे तौर पर सिस्टम के जिम्मेदारों तक पहुंचाई जा रही है, और इस कलेक्शन के मास्टरमाइंड के
रूप में जयपाल का नाम चर्चा में है।
थाईलैंड कनेक्शन: मर्यादा की नीलामी
‘एक्यम स्पा’ में थाईलैंड और अन्य देशों से लाई गई युवतियों के जरिए जो ‘स्पेशल सर्विस’ का खेल चल रहा है, वह पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। सवाल यह है:
- वीजा और दस्तावेज: क्या जयपाल और संबंधित अधिकारियों ने इन विदेशी युवतियों के पासपोर्ट और वर्क वीजा की कभी जांच की? या फिर ‘नोटो की गड्डी’ ने कानून की आंखों पर ऐसी पट्टी बांधी है कि वे दस्तावेज देखना ही भूल गए?
- इंटेलिजेंस की विफलता या मिलीभगत: क्या थाने के पास चल रहे इस अड्डे की जानकारी ‘इंटेलिजेंस’ को नहीं है? या फिर ‘जयपाल’ के मैनेजमेंट के आगे पूरे थाने का सिस्टम घुटने टेक चुका है?
जनता का आक्रोश: अब नहीं सहेगा बोडकदेव
पॉश इलाके की शांति और सुरक्षा को ‘हफ्ता वसूली’ के नाम पर दांव पर लगा दिया गया है। शाम ढलते ही लग्जरी गाड़ियों का जमावड़ा यह बताने के लिए काफी है कि यहां ‘मसाज’ नहीं, बल्कि ‘मौज-मस्ती’ का बाजार सजता है।
निवासियों ने अब आर-पार की चेतावनी दी है। जनता का सीधा सवाल है:
- जयपाल का रसूख कितना बड़ा है? क्या वह कानून से भी ऊपर है कि उसे कोई छू नहीं सकता?
- पुलिस कमिश्नर साहब, क्या आप इस ‘वहीवत’ तंत्र को उखाड़ फेंकेंगे?
निष्कर्ष: वर्दी पर लगा दाग
यह मामला मात्र एक स्पा का नहीं, बल्कि वर्दी की आड़ में चल रही उस ‘दलाली’ का है जिसने खाकी की गरिमा को तार-तार कर दिया है। यदि जयपाल जैसे ‘वहीवतदारों’ पर लगाम नहीं कसी गई, तो बोडकदेव की सड़कों पर जनता का गुस्सा कभी भी फूट सकता है।
क्या पुलिस प्रशासन अपनी साख बचाएगा, या ‘जय+पाल ‘ का यह ‘हफ्ता राज’ इसी तरह चलता रहेगा? —

