धर्म, गोरक्षा और हिंदुत्व को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली BJP सरकार और RSS की बड़ी-बड़ी बातें गुजरात और देश की भोली-भाली जनता के सामने बेनकाब हो गई हैं। एक तरफ गाय को माता बताकर चुनावों में हिंदू वोट हासिल किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी सरकार के राज में देश भर में हजारों बूचड़खानों को मंजूरी देकर ‘पिंक रेवोल्यूशन’ को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। अधिकारियों ने बूचड़खाने चलाने वाली कंपनियों से इलेक्टोरल बॉन्ड और डोनेशन के नाम पर करोड़ों रुपये वसूलकर अपने असली इरादे जाहिर कर दिए हैं।
10,735 बूचड़खानों को मंजूरी!: गोरक्षा के नाम पर सिर्फ उन्माद फैलाया गया!
मिली जानकारी और आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में करीब 10,735 बूचड़खानों को मंजूरी दी गई है। गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी और प्रशासन की छत्रछाया में कसाइयों और बिना इजाज़त चल रहे बूचड़खानों पर चार हाथ होने के आरोपों ने राजनीति गरमा दी है। संघ और BJP ने गाय, गौरक्षकों और बूचड़खानों के नाम पर समाज में हिंदुत्व का उन्माद फैलाने और ध्रुवीकरण करने के अलावा ज़मीन पर कुछ नहीं किया है। अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात गौवंश की रक्षा के लिए निकलने वाले गौरक्षकों की भावनाओं का इस्तेमाल सिर्फ़ वोट बैंक की राजनीति के लिए किया गया है।
चंदा लेकर ‘गुलाबी क्रांति’ को बढ़ावा देना: हिंदुत्व सरकार की नीतियां उलटी हो गई हैं!
खुद को गौरक्षक और हिंदू रक्षक कहने वाले शासकों ने मीट एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों और बूचड़खानों के मालिकों से करोड़ों रुपये का चंदा लिया है। गाय के नाम पर वोट मांगने वाली सरकार ने बूचड़खानों से पैसा लेकर देश को मीट एक्सपोर्ट में आगे बढ़ाया है। यह कड़वी सच्चाई इस बात का सबूत है कि गुजरात और देश की जनता को “मुंह में राम और बगल में छुरी” जैसी नीति अपनाकर लगातार गुमराह किया जा रहा है।
महानगर मेट्रो की जनता जोग लालाकर: गुजरात की जनता कब तक धोखा खाती रहेगी?
महानगर मेट्रो न्यूज़ लोगों की आस्था और धार्मिक भावनाओं से खेलने वाले इन नेताओं से सीधे सवाल पूछता है:
गाय के नाम पर वोट मांगने वाली सरकार किस तरह से बूचड़खानों से करोड़ों रुपये का चंदा लेती है?
हजारों बूचड़खानों को इजाजत देकर देश में पिंक रेवोल्यूशन लाने के पीछे असली चेहरा कौन है?
क्या गोरक्षा सिर्फ भाषणों और चुनाव प्रचार तक ही सीमित रह गई है?
गुजरात की जागरूक जनता को अब इस राजनीतिक पंचायत और अंधभक्ति से बाहर निकलकर सवाल पूछने की जरूरत है। अब समय आ गया है कि जनता ऐसी बॉडी लैंग्वेज और डिप्लोमेसी को पहचाने जो गाय माता और आस्था के नाम पर धंधा कर रहे हैं और उन्हें कड़ा जवाब दें!

