आज की पॉलिटिक्स और पूरे गवर्नेंस सिस्टम की एक ऐसी कड़वी और डरावनी सच्चाई है, जिसे अगर देश की जनता आज भी न समझने का नाटक करेगी, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह देश सिर्फ़ शासकों और नेताओं का रह जाएगा। जिसे हम डेमोक्रेसी का महासंग्राम, लोगों के हक़ की लड़ाई या डेमोक्रेसी का मंदिर समझते हैं, वह असल में सत्ता पाने और बनाए रखने के लिए पहले से तय सौदेबाजी का खेल बन गया है। जब तक देश का आम नागरिक पूरी सरकार, एडमिनिस्ट्रेटिव और पॉलिटिकल सिस्टम को सीधे जनता के प्रति जवाबदेह नहीं बनाता, सरकार और विपक्ष के बीच सिर्फ़ ‘एक्सचेंज’ ही होता रहेगा, बेसिक
सिस्टम में कभी कोई असली ‘बदलाव’ नहीं आएगा!
रात को उसी टेबल पर शाही डिनर और सुबह पार्लियामेंट के बाहर प्रोटेस्ट का सुपरहिट ड्रामा!
देश के लोगों को अब अपनी अंधविश्वास वाली आंखों से कड़वी सच्चाई देखने की ज़रूरत है। जो नेता टीवी कैमरों के सामने एक-दूसरे पर कीचड़ उछालते हैं, एक-दूसरे को देश का गद्दार या डेमोक्रेसी का हत्यारा कहते हैं और पार्लियामेंट या लेजिस्लेटिव असेंबली के दरवाज़ों पर हाथों में प्लेकार्ड लेकर प्रोटेस्ट करने का दिखावा करते हैं, वही नेता दिल्ली या मुंबई में हाई-प्रोफाइल शादियों में या बंद कमरों में एक ही टेबल पर बैठकर हंसी-मज़ाक के साथ ग्रैंड डिनर करते हैं। जो मुद्दे लोगों के लिए ज़िंदगी और मौत, महंगाई, बेरोज़गारी या सुरक्षा के हैं, वे इन नेताओं के लिए सिर्फ़ ‘चुनावी मुद्दे’ बनकर रोटी सेंकने और वोट बैंक बचाने के लिए बन गए हैं।
चाहे दिल्ली हो या झारखंड… लोगों पर लाठियां और नेताओं को पब्लिसिटी!
देश के एक कोने (दिल्ली) में भविष्य बनाने की उम्मीद कर रहे मासूम स्टूडेंट्स को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां बरसाई जा रही हैं, तो दूसरे कोने (झारखंड) में युवाओं के हक और रोज़गार छीने जा रहे हैं। इन हुक्मरानों या विपक्ष के किसी भी नेता को कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा। इनके लिए देश के किसी भी कोने में होने वाली कोई भी डरावनी या दर्दनाक घटना, कैमरों के सामने चिल्लाने, एक-दूसरे पर आरोप लगाने और बाइट देने और खुद को पब्लिसाइज़ करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का एक नया मौका है। जब तक पार्लियामेंट और असेंबली के अंदर बैठे इन ताकतवर नेताओं की आत्मा में सिस्टम बदलने और करप्शन खत्म करने की असली आग नहीं जलेगी, तब तक यह काला धंधा ऐसे ही चलता रहेगा।
सिस्टम में सड़न: एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस सिर्फ नेताओं की सेवा में बिज़ी
देश की जनता टैक्स इसलिए देती है ताकि उन्हें पीने का साफ पानी, सड़क, हेल्थ, एजुकेशन और सिक्योरिटी मिले। लेकिन असलियत यह है कि जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाला एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस सिस्टम सिर्फ अधिकारियों और ताकतवर नेताओं की सेवा में बिज़ी है। आम नागरिक के लिए कानून सख्त है, लेकिन नेताओं और उद्योगपतियों के लिए कानून के दरवाजे पीछे से खुले हैं। अगर आम आदमी अपने हक के लिए आवाज उठाता है, तो उसे सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है, जबकि देश को लूटने वाले खुलेआम घूम रहे हैं।
महानगर मेट्रो की तरफ से देशवासियों को सीधी चुनौती: अंधभक्ति छोड़ो, जागो और सवाल पूछो! लोगों को अब पॉलिटिकल पार्टियों और चेहरों की अंधभक्ति से बाहर निकलना होगा। सिर्फ़ नेता या पार्टी बदलने से देश या इलाके की किस्मत कभी नहीं बदलेगी, जब तक कानून, पुलिस और एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम लोगों के हर पैसे और हर सवाल का जवाब देने के लिए मजबूर नहीं होंगे। अगर लोग चुपचाप यह पॉलिटिकल ड्रामा देखते रहेंगे, तो ये पॉलिटिकल चेहरे बदलते रहेंगे लेकिन लोगों की हालत वैसी ही रहेगी।
महानगर मेट्रो न्यूज़ की यह आवाज़ देश के कोने-कोने तक पहुँचनी चाहिए — अब ड्रामा बंद करो, अकाउंटेबिलिटी तय करो और देश के लोगों को सही जवाब दो!

