मुंबई/अहमदाबाद । शनिवार की वह मनहूस सुबह। मुंबई के वर्ली इलाके की ‘पूर्णा’ बिल्डिंग के 15वें माले पर स्थित आलीशान फ्लैट में सन्नाटा पसरा था। भाजपा के चाणक्य और भारत को डिजिटल क्रांति की राह दिखाने वाले प्रमोद महाजन सुबह अखबार पढ़ रहे थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि अगले ही पल उनकी पीठ के पीछे मौत खड़ी है—और वह मौत कोई दुश्मन नहीं, बल्कि उनका अपना सगा भाई प्रवीण महाजन था। 22 अप्रैल 2006 की सुबह प्रवीण महाजन ने पारिवारिक विवाद के बीच अपने भाई पर गोलियां चला दी थीं।
7:30 बजे की वह खौफनाक वारदात
सुबह करीब साढ़े सात बजे प्रवीण महाजन अचानक घर में दाखिल हुआ। कुछ देर की कहासुनी के बाद पूरा इलाका गोलियों की गूंज से दहल उठा। प्रवीण ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से एक के बाद एक गोलियां अपने ही भाई के सीने में उतार दीं। रिपोर्ट्स के अनुसार चार गोलियां चलाई गई थीं, जिनमें से तीन ने गंभीर रूप से प्रमोद महाजन को घायल कर दिया। वह खून से लथपथ होकर गिर पड़े और देश की राजनीति का सबसे चमकता सितारा पल भर में अंधेरे में डूब गया।
अदालत में भाई की ‘विस्फोटक’ और ‘अश्लील’ जुबानी
इस हत्याकांड ने पूरे देश को सुन्न कर दिया था, लेकिन मुकदमे के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने रिश्तों की गरिमा को तार-तार कर दिया। प्रवीण महाजन ने अदालत में कई ऐसे बयान दिए, जिन्हें संवेदनशील मानते हुए इन-कैमरा रिकॉर्ड किया गया।
संपत्ति का विवाद या अहंकार? प्रवीण का दावा था कि प्रमोद उन्हें छोटा और मामूली समझते थे। पुलिस चार्जशीट में भी ‘injured ego’ और आर्थिक असंतोष को हत्या की मुख्य वजहों में बताया गया।
आरोप या षड्यंत्र? प्रवीण ने अपने बयान में प्रमोद महाजन के निजी जीवन को लेकर कई गंभीर और विवादित आरोप लगाए, जिनसे मुकदमे ने सनसनीखेज मोड़ ले लिया।
बड़ा सवाल: क्या प्रवीण महज एक सिरफिरा कातिल था या वह किसी गहरे राजनीतिक षड्यंत्र का मोहरा? यह सवाल आज भी इस केस की सबसे रहस्यमयी परतों में शामिल है।
महानगर मेट्रो विशेष: बीजेपी के ‘चाणक्य’ का अंत
प्रमोद महाजन केवल एक नेता नहीं थे, वे भाजपा के संकटमोचक और आधुनिक भारत की टेलीकॉम क्रांति के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते थे। अटल-आडवाणी युग के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जाता था। लेकिन एक भाई की नफरत ने भारतीय राजनीति का एक बड़ा अध्याय हमेशा के लिए खत्म कर दिया। 13 दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद 3 मई 2006 को उनका निधन हो गया। ([Wikipedia][1])
क्या थी उस कत्ल की असली वजह?
आज भी ‘खाकी कवर’ की फाइलें उन सवालों से भरी हैं, जिनका मुकम्मल जवाब शायद प्रवीण के साथ ही चला गया। क्या वह महज एक भाई की ईर्ष्या थी, या प्रमोद महाजन की बढ़ती ताकत किसी की आंखों में खटक रही थी—यह रहस्य आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है।
अगले अंक में देखिए: प्रमोद महाजन के निधन के बाद उनके पीए विवेक मोइत्रा की संदिग्ध मौत और महाजन परिवार से जुड़े वे काले साये, जिन्होंने सत्ता के गलियारों को हिला कर रख दिया।

