जामनगर जिले के लालपुर तालुका में सरकारी बिजली कंपनी GETCO (जेटको) और लोकल पुलिस सिस्टम की मिलीभगत के खिलाफ एक किसान ने मोर्चा खोल दिया है। नाना खड़बा गांव के रहने वाले गंगासिंहजी वढेर ने जामनगर के डिस्ट्रिक्ट पुलिस चीफ (DSP) को लिखकर नकली अंगूठे लगाकर घोटाला करने वाले जेटको अधिकारियों के खिलाफ तुरंत FIR करने और पूरे मामले की FSL जांच कराने की मांग की है।
झगड़े की जड़: 40 KV लाइन और नकली अंगूठे का निशान
किसान के मुताबिक, उसकी ज़मीन जिसका अकाउंट नंबर-743 और सर्वे नंबर-123 है, मोरख-खड़बा गांव में है। साल 2012 में जेटको ने इस ज़मीन से 40 KV की बिजली लाइन गुजारी थी।
RTI से घोटाले का खुलासा: किसान ने कभी बिजली लाइन बिछाने के लिए अपनी मंज़ूरी नहीं दी और न ही कोई मुआवज़ा लिया। लेकिन एक RTI क्वेरी से पता चला कि कंपनी ने नकली डॉक्यूमेंट्स बनाए थे और किसान का नकली अंगूठा ले लिया था।
कानूनी गड़बड़ी: जेटको का दावा है कि ट्रांसमिशन टावर एक्ट के तहत ज़मीन के मालिक की सहमति ज़रूरी नहीं है। अगर सहमति ज़रूरी नहीं थी, तो किसान का नकली अंगूठा कागज़ पर क्यों लिया गया? यह सवाल सिस्टम पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
लालपुर पुलिस स्टेशन का कार्रवाई न करना और समझौते का दबाव
भले ही किसान ने लालपुर पुलिस स्टेशन में लिखकर शिकायत की थी, पुलिस ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की:
FIR दर्ज नहीं: भले ही डॉक्यूमेंट में नकली अंगूठा दिखाना एक गंभीर और गंभीर अपराध है, फिर भी पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। यह भी दर्ज नहीं किया गया है कि विवादित कागज़ FSL (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) को नहीं भेजे गए हैं।
किसान का आरोप: पुलिस प्राइवेट/पावर कंपनियों के खिलाफ किसानों की एप्लीकेशन को मनमाने ढंग से खारिज कर देती है और कंपनियों के साथ ‘समझौता’ करने के लिए किसानों पर दबाव बनाने के लिए गलत व्यवहार करती है। किसान की मुख्य मांगें और 15 दिन का अल्टीमेटम
गंगासिंहजी वढेर ने DSP से ये सख्त मांगें की हैं:
- नकली कागज़ात बनाने वाले जेटको अधिकारियों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए।
- 2012 के विवादित कागज़ात ज़ब्त करके नकली अंगूठे के निशान की जांच के लिए FSL को भेजे जाएं।
- सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन करके FIR दर्ज न करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की जाए।
किसान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अगले 15 दिनों में इस मामले में FIR दर्ज नहीं की गई, तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और इंडियन सिविल सिक्योरिटी कोड (BNSS) के तहत सीधे क्रिमिनल कंप्लेंट करेंगे।

